नई दिल्ली (हि.स.)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी महासचिव खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी किए जाने के आरोप में तत्काल गिरफ्तार किए जाने की मांग की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा है कि भारत में किसी भी धर्म और उसके धार्मिक नेता के खिलाफ किसी भी तरह की आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बातें करने की अनुमति नहीं है। संविधान में भी इस तरह की धार्मिक हस्तियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से सख्ती से रोका गया है लेकिन इसके विपरीत वसीम रिजवी के जरिए लगातार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के खिलाफ बयानबाजी की जा रही है और उनकी शान में गुस्ताखी की जा रही है। इस पर रोक लगाने की जरूरत है।
मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा है कि भारत में हमेशा से हिंदू धर्माचार्यों, कवियों आदि के जरिए पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के सम्मान में कविताएं और अच्छे विचार व्यक्त किए गए हैं। कभी भी किसी भी व्यक्ति या धार्मिक व्यक्तियों की तरफ से पैगंबर साहब के खिलाफ किसी भी तरह की कोई हीन भावना रखने या टिप्पणी आदि नहीं की बात सामने नहीं आई है। लेकिन वसीम रिजवी लगातार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब, उनके साथियों और उनके परिवार के लोगों के खिलाफ जहर उगलता फिर रहा है।
उनका कहना है कि हाल में एक पुस्तक के माध्यम से भी उसने पैगंबर साहब पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि बार-बार उसकी तरफ से इस तरह की हरकत किए जाने से मुसलमानों और दूसरे तमाम लोगों की दिल को ठेस पहुंच रही है। इसलिए उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में हिंदू और मुसलमान हमेशा से मिलजुल कर रहते आ रहे हैं और दोनों तरफ से दोनों धर्मों के नेताओं और उनकी पुस्तकों आदि का मान सम्मान किया जाता रहा है।ऐसी कोई घटना सामने नजर नहीं आती है कि हिंदुओं ने मुसलमानों के धार्मिक नेता या पैगंबर आदि पर किसी भी तरह की कोई गलत टिप्पणी की हो और इसी तरह मुसलमानों की तरफ से हिंदुओं की धार्मिक पुस्तकों और धर्मगुरुओं आदि पर किसी भी तरह की गलत टिप्पणी की गई हो। इसलिए हम चाहते हैं कि पैगंबर का अपमान करने वाले वसीम रिजवी को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए ताकि हमारे देश में किसी भी तरह की अशांति पैदा नहीं होने पाए।
