प्रयागराज (हि.स.)। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक विकास भवन में पूर्व मंडलायुक्त आरएस वर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें पेंशनरों ने ट्रेन किराये में छूट की पूर्व व्यवस्था लागू करने सहित अन्य मांगें रखीं।
पेंशनर्स ने इस बात पर घोर निराशा व्यक्त की कि इस बार आजादी के अमृत महोत्सव होने के बावजूद ट्रेन किराए में सीनियर सिटिजन को मिलने वाली छूट और शहीदों की विधवाओं, आतंकियों एवं उग्रवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में शहीद हुए पुलिसकर्मियों और अर्द्धसैनिक बल के जवानों की विधवाओं को मिलने वाली 75 प्रतिशत छूट पुनः प्रारम्भ नहीं की गई है। जबकि वर्तमान और पूर्व विधायकों, सांसदों को ट्रेन यात्रा पूर्णतः फ्री है।
उन्होंने कहा चिंता का विषय है कि कोरोना के कारण बंद हुई छूट लगभग ढाई वर्ष बाद भी पुनः शुरू नहीं हुई है। जबकि कोरोना लगभग समाप्त हो गया है और ट्रेनें भी एक वर्ष से सामान्य रूप से चलने लगी हैं। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ट्रेन किराए में मिलने वाली उक्त सभी छूट तत्काल पूर्ववत प्रारम्भ की जाए। इस बारे में प्रधानमंत्री और रेलमंत्री से अनुरोध किया गया है।
पेंशनर्स ने बैठक में पुनः पुरानी पेंशन लागू करने की आवाज उठाई और 80 वर्ष पर सीधे 20 प्रतिशत पेंशन वृद्धि के बजाए 65, 70, 75 वर्ष की आयु पर क्रमशः 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत पेंशन वृद्धि करते हुए 80 वर्ष की आयु में 20 प्रतिशत वृद्धि रखने की मांग की। साथ ही केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता 3000 रुपये प्रति माह दिए जाने की भी मांग की गई। वर्मा ने कहा कि इन बिंदुओं पर पुनः शासन को ज्ञापन भेजा जाएगा।
बैठक में पुनरक्षित डायरेक्टरी और एसोसिएशन की मैगज़ीन ज्योतिका की नवम किरण प्रकाशित किए जाने के बारे में भी निर्णय लिया गया। अध्यक्ष आरएस वर्मा ने बताया कि उन्होंने बीते 2 सितंबर को अपने नेत्र का दान किया है। उन्होंने सभी पेंशनर्स से नेत्र दान और अंगदान के महत्व के बारे में बताते हुए अपील की कि वे इस दान को करने पर गंभीरता से विचार करें और नेत्र दान कर किसी नेत्रहीन की आंखों को रोशनी प्रदान करे। बैठक के दौरान सहित्याजंली द्वारा एसोसिएशन की संयुक्त सचिव और वरिष्ठ साहित्यकार जया मोहन पर निकाले गए विशेषांक का विमोचन किया गया। बैठक में प्रमुख रूप से डॉ पीके सिन्हा, डॉ सुधा प्रकाश, शंभू नाथ भारतीय, किरण बाला पांडेय सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।
विद्या कान्त
