Wednesday, February 25, 2026
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पूर्वांचल में कांग्रेस की सियासी जमीन खिसकी, पूर्व विधायक ललितेशपति ने छोड़ी पार्टी

औरंगाबाद हाउस के मजबूत क्षत्रप वेट एंड वाच की स्थिति में, फिलहाल किसी दल में नहीं जायेंगे

वाराणसी (हि.स.)। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र मड़िहान के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने गुरूवार को कांग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

कुछ दिन पूर्व पार्टी संगठन के पदों से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आये ललितेश के इस कदम से वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में कांग्रेस की सियासी जमीन भी विधानसभा चुनाव 2022 के पूर्व ही खिसकने लगी है। पार्टी नेतृत्व के बदले तेवर और रवैये से आहत पूर्वांचल में युवा ब्राह्मण चेहरा ललितेश पति ने कहा कि पार्टी में पीढ़ियों से जुड़ने के बाद भी उनकी अनेदखी हो रही थी। उन्होंने पार्टी संगठन को सही राह पर लाने के लिए अपनी ओर से पूरा प्रयास भी किया। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अब पार्टी से अलग होने का निर्णय ले लिया।

ललितेश ‘औरंगाबाद हाउस’ स्थित अपने पैतृक आवास पर पत्रकारों से मुखातिब थे। समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कयास को ललितेशपति त्रिपाठी ने नकार दिया, कहा कि फिलहाल किसी अन्य दल में नहीं जा रहा हूं और इस सम्बंध में किसी दल से कोई बात भी नहीं हुई है। अभी इस विषय पर अपने समर्थकों और साथियों के साथ विमर्श और उनके राय के बाद अपने राजनीतिक भविष्य का निर्णय लूंगा। उन्होंने कहा कि समर्थक कहेंगे तो 2022 में विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ूंगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस दिन किसी और दल में शामिल होऊंगा, उस दिन सबसे पहले इसकी जानकारी वाराणसी में ही सार्वजनिक करूंगा।

एक अन्य प्रश्न के जबाब में ललितेश ने कहा कि भविष्य में देश की राजनीति में कांग्रेस ही ठोस विकल्प बनेगी। इस देश की आत्मा में कांग्रेस है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मिले स्नेह और सहयोग के लिए आभार भी जताया। निर्णय बदलेंगे के सवाल पर ललितेश ने कहा कि अपना निर्णय मैं वापस नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब-जब कांग्रेस नेतृत्व, इंदिरा गांधी संकट में रही तो कार्यकर्ताओं ने खुद को पार्टी और उनके प्रति समर्पित कर दिया था। मगर अब पार्टी में कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ लोगों का सम्मान नहीं रहा, जिसके कारण मुझे व्यक्तिगत कष्ट हुआ।

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व रहे पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी,राजीव गांधी, वर्तमान नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका से पं. कमलापति त्रिपाठी के परिवार का बेहद नजदीकी और पारिवारिक रिश्ता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पंडित कमलापति त्रिपाठी की उपेक्षा हुई तो उन्होंने पार्टी छोड़ने की बजाय नेतृत्व को पत्र लिखा था। तब उनका पत्र सियासी हल्के में काफी सुर्खियों में रहा। बाद में नेतृत्व को अपने भूल का एहसास हुआ तो उन्होंने त्रिपाठी परिवार को तवज्जो दी और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण पदों का दायित्व भी सौंपा। इसमें ललितेश पति भी शामिल हैं।

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