-महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी आसान और सुरक्षित: सीएमओ
वाराणसी (हि.स.)। परिवार नियोजन सेवाओं को सही मायने में धरातल पर उतारने और समुदाय में छोटे परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए पुरुषों को भी आगे आना चाहिए। पुरुष भी खुले मन से परिवार नियोजन साधनों को अपनाने को आगे आएं और उस मानसिकता को तिलांजलि दे दें कि यह सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी है। इसमें जो सबसे बड़ी दिक्कत सामने आ रही है, वह उस गलत अवधारणा का परिणाम है कि पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी आती है। इस भ्रान्ति को मन से निकालकर यह जानना बहुत जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी सरल और सुरक्षित है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी का । सीएमओ ने शुक्रवार को बताया कि पुरुष दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए और जब तक बच्चा न चाहें तब तक अस्थायी साधन कंडोम को अपना सकते हैं। वहीं, परिवार पूरा होने पर परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को भी अपनाकर अपनी अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद ने बताया कि पुरुष नसबंदी से यौन क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। उनका कहना है कि इस तरह यदि पति-पत्नी में किसी एक को नसबंदी की सेवा अपनाने के बारे में तय करना है तो उन्हें यह जानना जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बेहद आसान है और जटिलता की गुंजाइश भी कम है। पुरुष नसबंदी होने के कम से कम तीन महीने तक परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का प्रयोग करना चाहिए, जब तक शुक्राणु पूरे प्रजनन तंत्र से खत्म न हो जाएं। नसबंदी के तीन महीने के बाद वीर्य की जांच करानी चाहिए। जांच में शुक्राणु न पाए जाने की दशा में ही नसबंदी को सफल माना जाता है। डॉ. प्रसाद ने कहा कि नसबंदी की सेवा अपनाने से पहले चिकित्सक की सलाह भी जरूरी होती है ।
सेवापुरी के ग्रामसभा उपरवार के निवासी बृजेश सिंह (29) का कहना है कि दो बच्चों के बाद तीसरे बच्चे की चाह न होने पर उन्होंने परिवार नियोजन के स्थायी साधन पुरुष नसबंदी कराने के लिए सोचा । क्षेत्र की एएनएम अनीता देवी से पूरी जानकारी ली और उन्होंने प्रोत्साहित भी किया। जब उन्हें पता चला कि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी से आसान और सुविधाजनक है तो उन्होंने पत्नी की सहमति से खुद की नसबंदी का निर्णय लिया। नसबंदी के करीब एक साल हो चुके हैं। नसबंदी के अपने अनुभवों का साझा करते हुए वह बताते हैं कि हल्की एनेस्थिसिया दी जाती है जिससे दर्द नहीं होता। चंद मिनट में नसबंदी हो जाती है ।
-पुरुष नसंबदी का वाराणसी जिले में हाल
जिले में वित्तीय वर्ष 2017-18 में 47, वर्ष 2018-19 में 64 पुरुषों ने नसबंदी करवाई और 2019-20 में 121 पुरुषों ने नसबंदी करवाई । इसी तरह 2020-21 में 27 पुरुषों ने नसबंदी करवाई। वर्ष 2021-22 में 37 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है । कंडोम का इस्तेमाल साल दर साल बढ़ा है। वर्ष 2018-19 में 3,99,34, वर्ष 2018-19 में 3,94,025, वर्ष 2019-20 में 6,11,748, वर्ष 2020-21 में 5,30,641 एवं वर्ष 2021-22 में 5,30,641 कंडोम सरकारी क्षेत्र से इस्तेमाल हुए ।
-नसबंदी विफल होने पर यह भी प्रावधान
डीएचईआईओ बताते हैं कि नसबंदी के विफल होने पर 60 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है। नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर चार लाख रुपए की धनराशि दी जाती है । नसबंदी के 8 से 30 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर एक लाख रुपए की धनराशि दिये जाने का प्रावधान है। नसबंदी के बाद 60 दिनों के अंदर जटिलता होने पर इलाज के लिए 50 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है।
श्रीधर
