-पहले की सरकारों में कोई भी भर्ती पूरी नहीं हो पाती थी, कोर्ट को करना पड़ता था हस्तक्षेप
लखनऊ (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें आजादी के पहले और आजादी के बाद की स्थिति को देखना होगा। अधिकारी की चयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। अगर चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी तो वह अलग ढंग से काम करेंगे। इसके बाद प्रशिक्षण आता है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए। जिस क्षेत्र में वह जा रहे हैं, वहां सकारात्मक माहौल होना चाहिए। 2017 के पहले हम लोग जब भी किसी विभाग से बात करते थे तो कहा जाता था कि कर्मचारियों की कमी के चलते हम लोग प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। भर्ती में अड़चन का कारण अनियमितता थी। अब बदलाव दिख रहा है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को राजधानी लखनऊ में राज्य के प्रशासनिक संस्थानों को मजबूती के लिए आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग एक दशक से प्रदेश में नियुक्ति नहीं हो पा रही थी। जब भी नियुक्ति शुरू होती थी, तब पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने की वजह कोर्ट स्टे लगा देती थी। आप उम्मीद करते हैं कि जिस राज्य की आबादी 22 से 24 करोड़ हो वहां पुलिस कम हो। भर्ती बोर्ड से पूछा कि स्टे का कारण क्या है ? पता चला कि कोर्ट ने स्टे लगा रखा है। जिन मुद्दों पर कोर्ट ने रोक लगाई उसका निस्तारण करके कोर्ट को अवगत कराया। कोर्ट की रोक हटने के बाद पारदर्शी तरीके से पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण किया। शासन की नियत साफ होनी चाहिए। अगर पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हैं तो उस क्षेत्र में उसका लाभ दिखाई देगा। कुम्भ में मैने देखा। 45 दिन के कुम्भ में यह देखने को मिला। लोग सोचते थे कि हम बढ़ा-चढ़ा कर आंकड़े बता रहे हैं। इसके लिए पूरी तैयारी की गयी थी।
हमने कहा था कि कुम्भ में लगे कर्मचारियों की काउंसिलिंग करनी है। उन्हें बताया जाए कि आपको डंडा नहीं चलाना है। श्रद्धालुओं को पैदल न चलना पड़े। उनकी सभी सुविधाएं हों। बुजुर्गों को विशेष व्यवस्था दे सकते हैं। पुलिस केवल खड़ी रहे। वर्दी का डर हो, लाठी का नहीं। हमने कहा कि कुम्भ का संदेश देश और दुनिया में लेकर जाएंगे। उसी के अनुरूप काम हुआ। कुम्भ के आयोजन में पुलिस ने मित्र और परिवार के सदस्य के रूप में काम किया। उसकी श्रद्धालुओं ने खुलकर तारीफ की। 24 करोड़ श्रद्धालु आए। मौनी अमावस्या के दिन तो पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालु एक ही दिन में आए। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारी ताश के पत्ते की तरह फेंटे जाते थे। जिसने अच्छा किया उसे प्रोत्साहित किया गया, प्रमोशन हुआ। गड़बड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी। उसका परिणाम दिख रहा है। जो उत्तर प्रदेश देश के विकास में बाधक था, आज वह केन्द्र की ज्यादातर योजनाओं में नम्बर एक है।
मुख्यमंत्री ने जेई जैसी बीमारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1977 से मौतें हो रही थीं लेकिन उसकी चर्चा नहीं होती थी। शासन के कानों जूं नहीं रेंगता था। 1998 में पहली बार सांसद बना तो मैने संसद में मुद्दा उठाया। 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद हमने अंतरविभागीय समन्वय समिति गठित की। अभियान चलाकर इससे निजात मिली। मात्र तीन वर्ष के अंदर ही 95 प्रतिशत मौत रोकने में हम सफल हुए। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी समेत अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद रहे।
