Monday, April 13, 2026
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पानी को तरस रही बौद्ध महत्व की हिरण्यवती नदी

– 10 वर्ष में भी नहीं बन पाई जल प्रबंधन की योजना

-बोटिंग बना सपना, ट्यूबवेल भी नहीं कर रहा काम

कुशीनगर(हि. स.)। मई-जून की तपन अभी दूर है। फरवरी में ही बौद्ध महत्व की हिरण्यवती नदी पानी के लिए तरस रही है। पानी के लिए लगा ट्यूबवेल भी किसी काम नहीं आ रहा है। नदी के बुद्धा घाट पर चलने वाली बोटिंग भी बन्द हो गई है।

साल 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी रिंग्जिन सैम्फिल ने नदी जल व पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ लोगों को सुखद वातावरण के लिए पिकनिक स्पॉट उपलब्ध कराने के लिए नदी तट बुद्धा घाट योजना की नींव रखी थी। योजना में तहसील प्रशासन, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगरपालिका, टेम्पल एरिया मैनेजमेंट कमेटी की सहभागिता सुनिश्चित की गई।

लाइटिंग, पौधरोपण, शेड, सीढ़ियां, पार्किंग आदि बनाकर स्थल की खूबसूरती निखारी गई। घाट युवाओं व बच्चों का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन गया। बाद के वर्षों में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय व पूर्ण बोरा, एसडीएम वरुण पांडेय योजना को गति देते रहे। प्रसाधन, मियावाकी उद्यान, कैफेटेरिया, राष्ट्रीय ध्वज, चिल्ड्रेन्स पार्क आदि के नए कार्य कराए गए, किंतु दस साल की अवधि में जल प्रबंधन के लिए ठोस योजना नहीं बन पाई। जिससे बुद्धा घाट के वास्तविक उद्देश्य के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं। नवागत एसडीएम रत्नीका श्रीवास्तव ने इसका संज्ञान लेने की बात कही है।

नदी से जुड़ी है बौद्धों की आस्था:- निर्वाण पूर्व बुद्ध ने अंतिम बार हिरण्यवती नदी तट से जल ग्रहण किया था। इस नाते देशी विदेशी बौद्ध अनुयाइयों में नदी का बहुत महत्व है। सैलानी नदी जल से आचमन करते हैं।

गोपाल

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