-कई राजनीति कार्यक्रमों के मंच से राजद को नीचा दिखने से नहीं हैं चूके
पटना (हि.स.)। तीन दिसम्बर को पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आएंगे। इसके बाद 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बज जाएगा। इन सबके बीच बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। इसके केंद्र बिन्दु में सीएम नीतीश बने हुए हैं। यह कहावत राजनीति में सटीक बैठती है कि सियासत में कुछ भी स्थायी नहीं है।
नीतीश कुमार जिस सरकारी कार्यक्रम या किसी सभा में जाते हैं तो वे किसी न किसी बहाने वर्ष 2005 के पहले की चर्चा कर पूछते हैं कि तब कुछ था। ये तो हम आए और विकास का कितना काम किया। लोग भूलने लगे हैं। उन्हें याद कराते रहिए। वर्ष 2017 जैसी स्थिति है बिहार में, जब नीतीश ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला लिया था। तब आईआरसीटीसी घोटाले में तेजस्वी का नाम उछला था और अंतरात्मा की आवाज पर सुशासन बाबू ने अपनी राहें राजद से अलग कर ली थीं। अब तो एक घोटाले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट तक दायर हो चुकी है।
अब लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू परिवार पूरी तरह फंसा हुआ है। ऐसे में जदयू और राजद गठबंधन के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सियासत में दोस्ती-दुश्मनी कभी स्थायी नहीं रहती। सीएम नीतीश कुमार के रुख को देखकर तो यह असल में साबित होता है। कल के धुर विरोधी आज बेहद कट्टर समर्थक हो सकते हैं। नीतीश कुमार ने कई बार ऐसे कदम उठाए हैं जो हर बार ये संकेत देने वाले रहे हैं कि बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव होने वाला है। बहरहाल लालू-नीतीश की दोस्ती के इस चैप्टर की असली राजनीति जल्दी हीं पता चलेगी।
बीते दिन सीएम नीतीश मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। यहां सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी और भाजपा की दोस्ती कभी खत्म नहीं होगी। नीतीश जिस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी मौजूद थे। इसके अलावा कार्यक्रम में कई भाजपा नेता भी शामिल थे।
दीक्षांत समारोह के दौरान जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाषण देने की बारी आई तो उन्होंने कहा, ‘जितने लोग हमारे हैं, सब साथी हैं। सीएम नीतीश यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, छोड़िए ना भाई। हम अलग हैं आप अलग हैं। इसको छोड़ दीजिए। इससे क्या मतलब है। हमारा दोस्ती कहियो खत्म होगा क्या?। चिंता मत कीजिए, जब तक जीवित रहेंगे, तब तक आप लोगों (भाजपा) से संबंध बना रहेगा। हम सब मिलकर काम करेंगे। यह बात उन्होंने राष्ट्रपति, राज्यपाल को देखते हुए और भाजपा नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कही।
नीतीश कुमार ने आईएनडीआईए नाम पर कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने कहा कि इस नाम का क्या मतलब है? पांच राज्यों के हो रहे चुनाव के दौरान एमपी में कांग्रेस के विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा कर नाराजगी का संकेत दिया। इसी दौरान नीतीश कुमार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आईएनडीआईए गठबंधन के प्रति कांग्रेस का रवैया उदासीन है। कांग्रेस का सारा ध्यान पांच राज्यों के चुनाव पर केंद्रित है। इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने नीतीश कुमार से बात की और दूसरे ही दिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह ने रूखा बयान दिया कि वे चाहते हैं कि तुरंत मोदी को हटा दिया जाए। राजनीत में इतना जल्दी कुछ थोड़े होता है।
गोविन्द/चंद्र प्रकाश
