मेरठ(हि.स.)। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत की जा रही कार्रवाई का विरोध किया है। मंगलवार को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजकर व्यापारियों ने पांच करोड़ टर्नओवर वाले निर्माताओं से ऑनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न की व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठाई।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदेश के खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में रजिस्ट्रेशन के लिए 12 लाख तक के टर्नओवर की सीमा तय की गई है। परन्तु 12 लाख रुपये की सीमा मंहगाई के हिसाब से बहुत कम है। 12 लाख टर्नओवर के स्थान पर 40 लाख वार्षिक टर्नओवर तक का काम करने वाले व्यापारियों की रजिस्ट्रेशन की सीमा में रखा जाएं। फूड लाइसेंस के रिनुअल के समय लेट फीस, लाइसेंस समाप्त होने की तिथि से एक माह पूर्व से लगाई जा रही है। लाइसेंस की अन्तिम तिथि 31 मार्च होने के बाद एक मार्च से लेट फीस लगायी जा रही है, जो बिलकुल गलत है। लेट फीस की तारीख लाइसेंस समाप्त होने की तिथि के बाद से किया जाए। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में फूड एक्ट का लाइसेंस न पाए जाने पर सजा का प्राविधान खत्म किया जाए। जुर्माना अधिकतम रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस फीस का दोगुना किया जाए।
व्यापारियों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी अपर जिला मजिस्ट्रेट आदि को न्याय निर्णायक अधिकारी राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है। असल में प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे न्याय निर्णय में समय लगता है। समय लगने से व्यापारी उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता है तथा तकनीकी जानकार न होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी मात्र अधिकतम जुर्माना वसूल करना चाहते हैं। वह वाद को गुण दोषों के आधार पर तय करने की इच्छा नहीं रखते। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (फूड एक्ट) के लिए पूर्णकालिक न्याय निर्णायक अधिकारी की नियुक्ति की जानी आवश्यक है, जिससे व्यापारी को शीघ्र न्याय मिल सके।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट वाले छोटे व्यापारियों के लिए मानकों के आधार पर सैम्पिल फेल होने व जांच के समय अन्य छोटी कमियां पाए जाने पर अधिनियम की धारा-69 के अनुसार शमन के आधार कार्रवाई के लिए नियमावली जारी की जाए। खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर आवश्यक सूचना के लिए माप-तोल विभाग की पीसीआर एक्ट बना हुआ है, जिसके माध्यम से सभी पैकिंगों पर छपी सूचना की जांच की जाती है। वर्तमान में फूड एक्ट की लैब में भी पैकिंग एवं लेबलिंग एक्ट में खाद्य पदार्थों का सैम्पल पास होने के बाद भी सैम्पल का मिस ब्रांडेड या अद्योमानक घोषित किया जा रहा है। एक ही विषय पर दो विभागों से जांच, सजा व जुर्माना उचित नहीं है, इसलिए फूड एक्ट में पैकिंग एण्ड लेबलिंग के चालान समाप्त करने की व्यवस्था की जाए।
लोकेश अग्रवाल ने कहा कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग की आईटम में रिटेल के व्यापारी का खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में दिए गए पैकिंग एण्ड लेवलिंग एक्ट के कानूनों को पूरा करने में कोई योगदान नहीं है। पैकिंग कम्पनियों द्वारा तैयार कर भेजी जाती है, जिसमें रिटेल का व्यापारी कोई संशोधन नहीं कर सकता है। न्याय निर्धारण अधिकारी द्वारा कम्पनियों के साथ-साथ रिटेल व थोक के व्यापारियों को भी दण्डित किया जा रहा है। जबकि पैकिंग में कमी पाई जाने पर सिर्फ पैकिंग करने वाले को ही दोषी माना जाए, हॉलसेलर व रिटेलर को दण्डित न किया जाए। ऑनलाइन फूड चेन सप्लाई के डिलीवरी मैन के लिए लाइसैंस की अनिवार्यता हो। वर्तमान में भारी मात्रा में खाद्य पदार्थों का व्यापार ऑनलाइन फूड चेन सप्लाई व मल्टी नेशनल कम्पनियों के द्वारा किया जा रहा है, परन्तु ऑनलाइन फूड सप्लाई के डिलीवरी करने वाले व्यक्तियों के पास फूड लाइसेंस नहीं है।
पांच करोड़ तक टर्नओवर वाले निर्माताओं से ऑनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न की व्यवस्था समाप्त की जाए। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में निर्माताओं से ऑनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न मांगी जा रही है। निर्धारित समय पर जमा न करने पर 100 रुपये प्रतिदिन लेट फीस लगाई जा रही है। कुटीर घरेलू व मझौले उद्योग इसकी पूर्ति न कर पाने के कारण नष्ट हो जाएंगे। इसलिए पांच करोड़ तक टर्नओवर वाले निर्माताओं से ऑनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न की व्यवस्था समाप्त करने की कृपा करें। इस अवसर पर विजय मान, निशांक अग्रवाल, राजकुमार त्यागी, अतुल्य गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
कुलदीप/मोहित
