प्रयागराज (हि.स.)। पारि-पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केन्द्र, प्रयागराज द्वारा बुधवार को एक होटल में पर्यावरण में वानिकी प्रति का हस्तक्षेप विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरु की गयी। जिसका शुभारम्भ मुख्य अतिथि सांसद केशरी देवी पटेल ने किया। साथ ही केन्द्र से प्रकाशित पुस्तकों यथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में यूकेलिप्टस कृषिवानिकी से समृद्धि तथा कार्यक्रम पर आधारित सार पुस्तिका का विमोचन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने वनरोपण पर जोर दिया तथा केन्द्र द्वारा विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों को पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय जलवायु के अनुसार रोपित करके पर्यावरण को बचाने तथा किसानों की आजीविका को दुगुना बनाने के प्रयास की सराहना की। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित प्रमोद कुमार गुप्ता, वन संरक्षक, वाराणसी क्षेत्र तथा प्रयागराज के अन्य वन विभाग अधिकारियों से प्रदेश की सरकारी खाली पड़ी भूमि पर विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों को रोपित कराने को कहा। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में न्याय नगर पब्लिक स्कूल से आये रंगोली कला में निपुण बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किया। केन्द्र प्रमुख डॉ संजय सिंह ने बताया कि केन्द्र कृषि वानिकी और उपयुक्त वृक्षों के माध्यम से बेकार पड़ी भूमि की उत्पादकता बढ़ा कर वनावरण को 33þ तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध है।
डॉ एस रामाराव, संयंत्र जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, जैव प्रौद्योगिकी एवं जैव सूचना विभाग, उत्तर पूर्वी पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग ने क्लोनल वानिकी के जैव प्रोद्योगिकी तथा जिनोमिक दृष्टिकोण पर चर्चा की। वक्ता डॉ ई.वी.आर राजू ने जलवायु परिवर्तन प्रभावों का सामना करने के लिए एक प्रकृति आधारित समाधान के रूप में पारिस्थितिक बहाली पर भारत के कोयला खनन क्षेत्रों से सफलता के बिन्दुओं पर व्याख्यान दिया। प्रसनजीत मुखर्जी ने पर्यावरण पुनर्वास के अंतर्गत निम्नीकृत भूमि को पुनर्स्थापित करने के तरीकों पर अपने अनुभव साझा किये। डॉ संजीव ठाकुर ने कहा कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए क्लोनल वानिकी द्वारा जलवायु को लचीला बनाकर पर्यावरण में सुधार लाया जा सकता है। प्रमोद कुमार ने गुणवत्ता वाले पौधों के खेत में रोपण की तकनीकी तथा उसके उपयोग पर चर्चा की। कौशल त्रिपाठी ने बबूल की महत्वपूर्ण प्रजाति के वृक्षों को रूट कटिंग के माध्यम से मजबूती प्रदान करने पर चर्चा की।
अन्त में वानिकी अनुसंधान और प्रसार के 30 वर्ष पर आधारित एक पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केन्द्र के जीवन पर तैयार की गयी एक वीडियो का प्रदर्शन किया गया। संगोष्ठी के प्रथम दिवस की शाम को सांस्कृतिक संध्या के रूप में प्रियंका चौहान ने लोकगीत तथा गजल के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम में उपस्थित शोधार्थियों ने विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किये। संगोष्ठी में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अनीता तोमर, डॉ कुमुद दूबे, डॉ अलोक यादव, डॉ अनुभा श्रीवास्तव के साथ वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ एस.डी शुक्ला तथा रतन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
