Wednesday, April 1, 2026
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पटरी दुकानदार यूनियन नें राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु

हरदोई(हि.स.) जनपद में आदर्श पटरी दुकानदार यूनियन द्वारा राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की गई। यूनियन के अध्यक्ष हिमांशु गुप्ता ने बताया कि अधिकांश दुकानदार गरीबी रेखा के नीचे ठेला,रेहड़ी,फुटपाथ पर दुकान और खोखा लगाकर अपने परिवारों का जीवन यापन कर रहे हैं। इन सभी प्रार्थियों में शायद ही कोई ऐसा हो जिसके परिवार में 7 से 8 सदस्य न हों। कोई पान की दुकान का संचालन कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रहा है तो कोई ठेला-रेहड़ी के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है।

इधर लगभग एक माह से पटरी दुकानदारों,ठेला-रेहड़ी व खोखा लगाने वालों पर प्रशासन ने कार्यवाही कर उनका जीना दूभर कर दिया है।कहीं आर्थिक दण्ड की पर्ची मिलती है तो कहीं सरेआम गालियां, तो कही सरेराह डंडों से पिटाई, समान फेक देना/अपमानित करना रोज का काम बन गया है जबकि समस्त छोटे दुकानदार प्रशासन व कर्मचारियों की प्रत्येक अनैतिक माँग को भी वर्षो से अपने परिवार के हित के लिए पूरा करते चले आ रहे है। 28 मई 2022 को जिला प्रशासन हरदोई द्वारा आहूत बैठक में साफ तौर से कह दिया गया कि हम किसी भी दशा में शहर के फुटपाथ,नाला,नाली पर रखे खोखों(लकड़ी/लोहे की छोटी दुकान) को लगने नही देंगे यदि 07 दिवस में दुकानें न हटी तो प्रशासन का बुलडोजर चलेगा और दुकानें जब्त कर ली जाएंगी।

श्री गुप्ता ने बताया कि हम सबने प्रशासन को लिखित रूप में कहा है कि अपनी दुकान,रेहड़ी,खोखा के पास साफ सफाई रखेंगे। यदि गंदगी पाई जाए तो हम पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाए, लेकिन हमें हटाया न जाये, लेकिन प्रशासन हमारे व्यापार को तहस नहस करने का मूड बना चुका है। हम नहीं जानते कि यह आदेश सरकार का है या प्रशासन का, लेकिन इतना जरूर जानते हैं कि यदि हमारी दुकानें बन्द हुईं तो हमारा परिवार भुखमरी की कगार पर होगा जिसका अनुभव हम सब कोविड19 के दौरान कर चुके हैं। उस समय लिए गए ऋण को हमसब अभी चुका नहीं पाए हैं । प्रशासन के इस फरमान ने हमारी नींद छीन ली है। हम अपनी आंखों के सामने अपने बच्चों व परिवार को भूखे मरते नहीं देख सकते ऐसी स्थिति में हमारे पास केवल एक ही रास्ता अवशेष है वह है परिवार सहित इच्छा मृत्यु। क्योंकि प्रशासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कोप का भाजन बनने से व बच्चों को भूखा मरते देख घुट-घुटकर मरने से तो अच्छा है कि हम सब परिवार सहित मृत्यु को गले लगा लें।

अम्बरीष

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