Monday, February 16, 2026
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पंचनद धाम में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से कराया गया मूर्ति विसर्जन

औरैया (हि.स.)। देश के ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध एकमात्र पौराणिक और धार्मिक स्थल के रूप में पांच नदियों का संगम औरैया जनपद में स्थित है। यमुना, चंबल, सिंध, पहुंच, और कुंवारी पतित पावनी नदियों में पवित्र स्नान कर संगम पर स्थित मां कर्णावती, बाबा साहब और महाकालेश्वर मंदिरोंं में विजयादशमी पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा। मंदिरों में दर्शन प्राप्त कर भक्तों ने आशीर्वाद मांगा।

पांच नदियों का संगम जहां पर एक नहीं दो नहीं बल्कि पांच-पांच नदियों का संगम होता है। यह विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर पांच नदियों का संगम होता है। प्रतिवर्ष बड़े-बड़े त्योहारों पर खास तौर पर विजयादशमी के दिन तीन या चार जनपदों की सीमा औरैया, इटावा और जालौन के साथ मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़ा होने के कारण यहां पर अपार भीड़ लगती है।

यहां पर स्वयं तुलसीदास जी ने आकर के इन पवित्र नदियों के संगम पर कुछ समय देकर रामायण के कुछ अंश लिखे थे, इसलिए यह स्थान और भी पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है। इस स्थान पर प्रतिवर्ष समय-समय पर क्षेत्र में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के बाद जनता-जनार्दन यहां पर पवित्र स्थानों में आकर दर्शन पूजन कर इच्छित फल प्राप्ति के लिए आते रहते हैं। इसी क्रम में आज इस स्थान पर सुबह से ही पूरे क्षेत्र में दर्शनार्थियों एवं भक्तों की लगातार भीड़ देखी गई। पंचनद धाम पर मूर्ति विसर्जन के लिए पुलिस प्रशासन चाक-चौबंद रही।

अनहोनी रोकने के लिए प्रशासन ने किए इंतजाम

पांच नदियों के संगम पंचनद धाम पर नवरात्र मूर्ति विसर्जन के बाद विजयादशमी पर्व के अवसर पर संगम तट पर सुबह से ही लोगों का स्नान चलता रहा। क्षेत्र में भव्य पंडालों में स्थापित की गई मां की मूर्तियों को इस संगम तट पर विसर्जित करने के लिए लोगों में जगह जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। हिन्दुस्थान समाचार ने मूर्ति विसर्जन स्थल का दौरा किया तो पाया कि प्रशासन सभी जगह चाक-चौबंद नजर आया एवं जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रास्ता बना कर नदी तट पर मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मूर्ति विसर्जन में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंडाल लगाकर के भोजन प्रसाद वितरण व पानी की व्यवस्था की। जगह-जगह पंडाल लगे हुए दिखाई दिए। प्रशासन ने जालौन की तरफ यमुना नदी तट पर खतरनाक जगह होने के कारण प्राकृतिक रूप से बनाई गई जलाशय में मूर्ति विसर्जित करने के लिए व्यवस्था कर रखी थी। वही, जनपद इटावा के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास नदी तट पर मूर्ति विसर्जन और जनपद औरैया में ग्राम जुहीखा के पुल के पास बालू तट पर मूर्ति विसर्जन के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं जहां शाम तक मूर्ति विसर्जन के लोग आते रहें।

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