नई दिल्ली (हि.स.)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आज 8 फरवरी से चल रही अपनी द्विमासिक बैठक के नतीजों का ऐलान करेगी। माना जा रहा है कि मौद्रिक नीति समिति रेपो रेट को यथावत रखेगी, लेकिन रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का फैसला किया जा सकता है।
1 फरवरी को आम बजट पेश होने के बाद आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की ये पहली बैठक है, जो मौजूदा वित्त वर्ष की आखिरी बैठक भी होगी। इस बार मौद्रिक नीति समिति के सामने महंगाई पर काबू पाने के साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण सुस्त पड़ी देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने की बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार कच्चे तेल की कीमत में हो रही बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों से निपटने की भी बड़ी चुनौती है।
जानकारों का कहना है कि देश के मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति नकदी के सामान्यीकरण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में रिवर्स रेपो रेट में मामूली बदलाव कर सकती है। बताया जा रहा है कि बजट में आर्थिक वृद्धि को लेकर दिए गए आश्वासनों और महंगाई के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति रिवर्स रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करके सामान्यीकरण की प्रक्रिया को शुरू कर सकती है।
कोरोना संक्रमण के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े दबाव को देखते हुए पिछली बैठक में भी मौद्रिक नीति समिति में लगातार नौवीं बार नीतिगत ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर ही बनाए रखने का फैसला लिया था। इसके पहले मार्च 2020 में मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की और मई में 40 आधार अंकों की कमी की थी, जिसके बाद रेपो रेट 4 फीसदी के स्तर तक लुढ़क गया था। मई 2020 के बाद अभी तक नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीति समिति को कोई भी फैसला लेने के पहले देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाने, महंगाई पर काबू पाने, विदेशी निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित करने, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी की समस्या से होने वाली परेशानियों पर काबू पाने, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत को मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियों पर ध्यान देना है। इसके साथ ही भारत के पास मौजूद विदेशी मुद्रा भंडार का भी सही ढंग से इस्तेमाल करने की एक बड़ी चुनौती भारतीय रिजर्व बैंक के सामने है।
भारत के पास फिलहाल लगभग 630 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। इससे करीब डेढ़ साल तक बिना किसी परेशानी के आयात बिल का भुगतान किया जा सकता है। ऐसे में रुपये की कीमत पर काबू पाने के लिए भारत सरकार खुले बाजार में डॉलर को बेचने का उपाय भी अपना सकती है। हालांकि इस बारे में आखिरी फैसला भारतीय रिजर्व बैंक और मौद्रिक नीति समिति को करना है। माना जा रहा है कि मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आज आने वाले उसके फैसलों में इन विषयों का भी उल्लेख हो सकता है।
योगिता
