Sunday, April 5, 2026
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निर्भया कांड के नौ साल बाद भी महिला नहीं है सुरक्षित

नई दिल्ली (हि.स.)। देश को झकझोर कर देने वाले निर्भया कांड को आज पूरे नौ साल हो गए हैं, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध अभी भी खत्म नहीं हुए है। महिलाएं अभी भी सुरक्षित नहीं है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों को देखे तो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2021 में महिलाओं के प्रति अपराध का ग्राफ बढ़ा है। वर्ष 2020 की बात करते तो दुष्कर्म के 1429 मामले दर्ज हुए। जबकि वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 1725 हो गया।

छेड़छाड़ की घटना को देखे तो पिछले वर्ष 1791 मामले दर्ज हुए, जबकि इस वर्ष 2157 मामले सामने आये। निर्भया कांड के बाद कानून में हुए बदलाव और दोषियों को हुई फांसी की सजा से माना जा रहा था कि महिला अपराध में कमी आयेगी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। महिलाएं अभी भी आये दिन अपराध का शिकार हो रही हैं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, निर्भया कांड की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जनता सड़क पर उतरी और यूपीए सरकार को महिला अपराध को लेकर बनाये गए कानून में बदलाव करना पड़ा था, लेकिन इस कानून का भी कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिला। महिलाएं न घर के बाहर बल्कि घर के भीतर भी असुरक्षित हैं।

निर्भया कांड का घटनाक्रम:

-16 दिसंबर 2012- चलती बस में एक नाबालिग सहित छह आरोपितों ने निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

-18 दिसंबर 2012- दक्षिण जिले की डीसीपी छाया शर्मा की देखरेख में इस मामले के चार आरोपितों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।

-21 दिसंबर 2012- आनंद विहार बस अड्डे से नाबालिग आरोपित को पकड़ा गया।

-22 दिसंबर 2012- छठे आरोपित अक्षय ठाकुर बिहार से गिरफ्तार किया गया।

-29 दिसंबर 2012 – निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

-3 जनवरी 2013- पुलिस ने पांच आरोपितों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण और डकैती में आरोप पत्र दाखिल किया।

-17 जनवरी 2013- फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचो बालिग आरोपितों पर आरोप तय किए।

-11 मार्च 2013 – तिहाड़ जेल में आरोपित राम सिंह ने फांसी लगाकर खुदकुशी की।

-31 अक्टूबर 2013 – जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिक को गैंगरेप और हत्या का दोषी करार दिया।

-10 सितंबर 2013 – फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार आरोपितों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को दोषी ठहराया गया।

-13 सितंबर 2013- कोर्ट ने चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

-13 मार्च 2014 – दिल्ली हाईकोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखी।

-15 मार्च 2014 – सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को फांसी दिए जाने पर रोक लगाई।

-20 दिसंबर 2015 – नाबालिग अपराधी को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया।

-27 मार्च 2016 – सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।

-5 मई 2017 – सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा।

-9 जुलाई 2018– रिव्यू पिटिशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा।

-7 जनवरी 2020 निर्भया के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी हुआ।

-20 मार्च 2020 — चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में दी गई फांसी।

अपराध वर्ष 2020 वर्ष 2021

दुष्कर्म 1429 1725

छेड़छाड़ 1791 2157

फब्ती कसना 350 373

अपहरण 2226 373

घरेलू हिंसा 1931 3742

दहेज हत्या 94 114

(आंकड़े 15 अक्टूबर तक)

अश्वनी

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