Monday, April 13, 2026
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निजीकरण के विरुद्ध बैंक कर्मियों ने किया पैदल मार्च

लखनऊ (हि.स.)। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फ़ेडरेशन (ऑयबाक) ने बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरुद्ध लड़ाई तेज कर दी है। रविवार को लोहिया पार्क से भारतीय रिज़र्व बैंक तक पैदल मार्च निकाला गया। इसमें दौरान बैंक कर्मी निजीकरण के विरोध में नारेबाजी करते रहे। यात्रा का समापन जंतर-मंतर, नई दिल्ली में 30 नवम्बर को एक रैली की शक्ल में होगा।

इसमें सौरभ श्रीवास्तव, प्रदेश महासचिव, बैंक ऑफ़ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि ‘‘बैंक निजीकरण से बैंक जमा की सुरक्षा कमजोर होगी। सरकार को बैंक निजीकरण का बिल संसद में लाने से पहले छोटे जमाकर्ताओं और देश की जनता के हितों के बारे में सोचना चाहिए। भारत में जमाकर्ता की कुल बचत, जो कि रु0 87.6 लाख करोड़ है, का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा 60.7 लाख करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पास है, जो कि अपनी जमा के लिए सरकारी बैंकों को प्राथमिकता देते हैं।’’

आयबॉक के राष्ट्रीय महासचिव सौम्या दत्ता ने कहा कि ‘‘यदि सरकार बैंक निजीकरण के अपने इरादों से पीछे नहीं हटती है तो राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ा विरोध प्रदर्शन और आन्दोलन होगा, जिसका खामियाजा सरकार को आगामी चुनाव परिणामों में देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह यात्रा कानपुर होते हुए आज आगरा पहुंचेगी जो कि कल नॉएडा होते हुए दिल्ली में 30 नवंबर को जन्तर मन्तर पर एक राष्ट्रीय धरने में परिणत होगी।

पवन कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑयबाक ने कहा कि बैंक निजीकरण से रोजगार घटेगा जिससे कमजोर वर्ग प्रभावित होंगे। बैंकों के विलय से सरकारी बैंककर्मियों की संख्या 8.44 लाख से 7.70 लाख हो गई। इस अवसर पर रिजर्व बैंक, गोमती नगर के पास मार्च के बाद सामाजिक अर्थशास्त्री मनीष हिन्दवी, कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत, कर्मचारी नेता विजय कुमार बंधू, वरिष्ठ पत्रकार उत्कर्ष सिन्हा के साथ बैंक ऑफ़ इंडिया से भास्कर, अमित तथा अपूर्व, भोलेंद्र प्रताप सिंह-आर्यावर्त बैंक, लक्ष्मण सिंह-यूनियन बैंक, शेषधर राव-सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया, आर.के.वर्मा-केनरा बैंक, अमरपाल सिंह-पंजाब नेशनल बैंक, हरी गुप्ता-इंडियन ओवरसीज बैंक आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।

अंत में जनता से अपील की गई कि भारत के सरकारी बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है को बेचने के विरूद्ध सशक्त आवाज उठाने में हमारी सहायता करें। सार्वजनिक बैंकों के लाखों छोटे जमाकर्ता, किसान, छोटे एवं मझौले उद्योग, स्वयं सहायता समूह और छोटे कर्जदारों, राजनैतिक दलों और श्रम संगठनों से अनुरोध है कि हमारे आंदोलन में शामिल हो, जिससे कि वर्षों की जमा पूंजी और जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद होने से रोका जा सके।

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