नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के पहले तीन दिन विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ने पर राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की चिंता जाहिर की है। सांसदों को लिखे अपने संदेश में नायडू ने कहा कि जिस तरह से तीन दिनों में घटनाएं हुई हैं, वहां बहुत परेशान करने वाली है। ये समझना बेहद मुश्किल है कि देश के लोगों की आवाज देश के उच्च सदन में नहीं उठ पा रही है।
नायडू ने लिखा है, ये सवाल उठता है कि सदन नहीं चलेगा,तब किसका फायदा होगा, निश्चित तौर पर देश और देश के लोगों को जानकारी ही नहीं कि संसद को बाधित करने के पीछे कौन है और क्या लाभ है।संसद का सत्र शुरू होने से पहले हुई बैठक में सभी नेताओं ने कहा था कि वहां सदन चलाना चाहते हैं और इसमें पूरा सहयोग देने वाले हैं,
लेकिन पिछले कुछ दिनों में ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है।
वेंकैया नायडू ने लिखा है, महामारी पर बहस के दौरान सभी को अपनी बाते सामने रखने का मौका मिला। पेगासस मामले पर आईटी मंत्री को अपना बयान देना था। लेकिन दुर्भाग्य है कि एक निचले स्तर की घटना हुई और मंत्री के हाथ से कागज छीन कर फाड दिया गया। इस तरह की घटनाएं संसदीय लोकतंत्र पर प्रहार है।इससे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को तारीफ नहीं मिलेगी, संविधान और संसद के प्रति सम्मान होना ही चाहिए।
वेंकैया ने लिखा, मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं, कि अपनी राजनीतिक जरूरतों को छोड़कर संसद को सुचारू रूप से चलाने में मदद करें। तीन हफ्तों बाद हम आजादी के 75 वे साल में जा रहे हैं। आजादी की लडाई लोगों के अपने राज के लिए लड़ी गई थी।
नाराज वेंकैया नायडू का सांसदों को पत्र, इस तरह की घटनाएं संसदीय लोकतंत्र पर प्रहार
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