– बेसहारा पशुओं व नीलगाय के आतंक से किसानों की नींद हराम
– घंटी की आवाज सुन खेतों के आसपास नहीं फटकेंगे बेसहारा पशु
– फसल की रखवाली करने में आसानी, नहीं करनी पड़ेगी मशक्कत
मीरजापुर (हि.स.)। छनवर के किसानों ने फसल बर्बाद करने वाले बेसहारा पशुओं व नीलगाय को डराने के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ लिया है। फसल रखवाली के लिए ऊंचाई पर खास तरह की घंटी लगाई गई है, जो हवा चलने पर खुद ही बजेगी। इससे फसल की रखवाली करने में आसानी होगी। इसका फायदा यह है कि इन जानवरों को भगाने के लिए उन्हें ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
जिले में असंख्य बेसहारा पशु हैं जो किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में अपनी फसल बचाने के लिए किसानों ने देशी तकनीक इजाद की है। किसानों का कहना है कि बेसहारा पशुओं से फसल बचाने के लिए रात भर जागना पड़ता है। इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। छनवर के विजयपुर गांव निवासी किसान गामा सोनकर बटाई पर 10 बीघे में खेती करते हैं। उन्होंने गेहूं, मटर, सरसों और अरहर की खेती की है। खेत के चारों तरफ जंगली कटीले झाड़ से बाड़ लगाकर रखवाली करने के बावजूद पशु खेत में घुस जाते हैं और फसल बर्बाद कर देते हैं। बेसहारा पशुओं से परेशान किसान गामा सोनकर को आइडिया आया कि अगर खेत में घंटी लगा दी जाए तो उसकी आवाज सुनकर ये पशु खेतों के आसपास नहीं फटकेंगे। एक तरफ थाली और दूसरी तरफ पत्थर का टुकड़ा अलग-अलग रस्सी से बांधकर लकड़ी के सहारे एक साथ लटका दिया गया है। हवा चलने पर दोनों के आपस में टकराने से घंटी जैसे आवाज उत्पन्न होती है। इस आवाज को सुनकर पशु खेतों से भाग जाते हैं। इससे न पशुओं को नुकसान होगा और न ही किसान को रातभर जागकर अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ेगी। यह बेहद आसान तरीका है। इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।
96 हजार बीघे का है छनवर का सिवान
बेसहारा पशुओं व नीलगाय से किसानों की नींद हराम हो गई है। कड़ी मेहनत कर किसान मंहगी खेती करते हैं, लेकिन बेसहारा पशु झुंड में पहुंचकर एक ही रात में फसल चट कर जा रहे हैं। छानबे ब्लाक (छनवर) का सिवान 96 हजार बीघे का है। ऐसे में किसान बेसहारा पशुओं से अपनी फसल बचाने की जुगत में जुटे हैं। पलक झपकते ही बेसहारा पशु फसल चट कर जाते हैं। बेसहारा पशुओं के आतंक से परेशान किसान फसल की रखवाली के लिए पहरेदार रखने को विवश हैं। सामूहिक रूप से रखवाली करने वाले को प्रत्येक पहरेदार को किसान पांच किलो प्रतिबीघा की दर से अनाज देते हैं या फिर एक बोझ सूखी फसल (डाठ) देते हैं।
कमलेश्वर शरण
