Tuesday, February 10, 2026
Homeउत्तर प्रदेशनाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में अद्भुत पल के साक्षी...

नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में अद्भुत पल के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु

चारों भाइयों के मिलन का क्षण, मानों समय थम गया हो,राजा रामचंद्र की जय,हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से गूंजा मैदान

वाराणसी (हि.स.)। धर्म नगरी काशी के लक्खा मेले में शुमार नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में शनिवार को श्री राम चरित्र मानस के उत्तरकांड की चौपाई ‘परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े। जीवंत दिखायी दी।

नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में अद्भुत पल के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु

14 वर्ष के वनवास में महा पराक्रमी रावण का बध करने के बाद अयोध्या लौटे भगवान राम समेत चारों भाइयों के मिलन के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु। मैदान और आसपास के मकानों के छत, मुंडेर पर मौजूद हर कोई आह्लादित हो गया। इस क्षण को अपने आंखों में संजों लेने की कोशिश के बीच पूरा इलाका राजा रामचंद्र की जय, हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। चारों तरफ से चारों भाइयों पर पुष्प वर्षा होने लगी। मिलन के बाद चारों भाइयों ने हर दिशा में उपस्थित भक्तों को दर्शन दिया।

चित्रकूट रामलीला समिति के इस विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप को देखने के लिए लोग दोपहर बाद से ही नाटी इमली मैदान में पहुंचने लगे। यह क्रम लीला के समापन तक बना रहा। इसके पूर्व रामलीला में दोपहर 3 बजकर 45 मिनट पर पुष्पक विमान पर सवार होकर प्रभु राम, लक्ष्मण व सीता अपने सेना प्रमुखों जामवंत, अंगद, लंकापति महाराज विभिषण के साथ धूपचंडी स्थित चित्रकूट रामलीला मैदान से भरत मिलाप स्थल नाटी इमली के लिए प्रस्थान किए।

नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में अद्भुत पल के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु

शाम चार बजे पुष्पक विमान लीला स्थल पर पहुंचा। उधर, पवनपुत्र हनुमान से भगवान राम, लक्ष्मण व माता सीता के वापस आने की सूचना पर भरत व शत्रुघ्न अयोध्या भवन से (बड़ा गणेश) चित्रकूट सीमा (नाटी इमली मैदान) की ओर नवापुरा, डीएवी कॉलेज, ईश्वरगंगी होते हुए प्रस्थान किए। इसी दौरान लोहटिया से पूर्व काशी नरेश के उत्तराधिकारी महाराज डॉ. अनंत नारायण सिंह अपने पुत्र के साथ हाथियों के काफिले के बजाय कार से नाटी इमली पहुंचे। रामलीला के मंच के समीप बने स्थान पर खड़े होकर डॉ अनंत नारायण सिंह ने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। इस दौरान मौजूद हजारों लोगों ने हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से महाराज कुंवर अनंत नारायण सिंह का स्वागत किया।

नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में अद्भुत पल के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु

इसके पश्चात पुलिस और पीएसी की सशस्त्र टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ आनर दिया। महाराज डॉ. अनन्त नारायण सिंह की उपस्थिति में शाम 4ः30 बजे नाटीइमली प्रतीक रूप से अयोध्या बार्डर पर भरत व शत्रुघ्न पहुंचे। दूर से ही अनुज भरत और शत्रुघ्न ने बड़े भइया राम, सीता और लक्ष्मण को देखा और वे शाष्टांग दंडवत हो गये। इधर भाई को इस तरह से दंडवत देखकर भगवान खुद को रोक नहीं सके और दौड़ पड़े। फिर अनंत भातृ प्रेम का विहंगम दृश्य दिखा जब भगवान भरत से गले मिले।तब घड़ी की सूइयां 4.40 पर थी। भगवान राम ने बारी-बारी से भरत और शत्रुघ्न को गले से लगाया। फिर चारों भाइयों के गले मिलते ही भातृ विरह की वेदना चारों भाइयों की आंखों से आंसुओं के रूप में बह निकली।

लीला स्थल पर मौजूद लाखों श्रद्धालुओं की आखें भी इस भाव विह्वल अदभुत पल को देख गीली हो गई। इसके पश्चात चारों भाइयों को पुष्पक विमान पर ले जाया गया, जहां भरत व शत्रुघ्न ने माता सीता को प्रणाम किया। यहां से चारों भाई पुष्पक विमान पर सवार होकर बड़ा गणेश प्रतीक रूप से अयोध्या के लिए प्रस्थान कर गये। आगे-आगे कार सवार महाराज बनारस की शाही सवारी व पीछे-पीछे परंपरानुसार लाल पगड़ी बांधे सैकड़ों यादव बंधु पुष्पक विमान को कंधे पर उठा कर चल रहे थे। पूरे रास्ते में छतों पर सड़क के किनारे खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर रथ पर विराजमान चारों भाइयों का दर्शन किया। नाटी इमली से ईश्वरगंगी, डीएवी कालेज, नवापुरा, लोहटिया होते हुए पुष्पक विमान अयोध्या भवन पहुंचा। यहां पर लीला व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने पंच स्वरूपों की आरती उतारी। इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप लीला का विश्राम हो गया

RELATED ARTICLES

Most Popular