श्वासारोध के कारण हुई नवजात की मृत्यु-पोस्टमार्टम रिपोर्ट
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। उत्तर प्रदेश में गोंडा जिले के एक सरकारी चिकित्सालय में नवजात की मौत के मामले में सोमवार की देर शाम एक स्थानीय पत्रकार के खिलाफ अस्पताल प्रशासन की तरफ से गंभीर धाराओं में अभियोग दर्ज कराया गया है। दूसरी तरफ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की चिकित्सा अधीक्षक के दावे के विपरीत नवजात की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत दम घुटने से बताए जाने के बाद गुत्थी एक बार फिर उलझती नजर आ रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुजेहना की अधीक्षक डा. सुमन मिश्रा व उनके 65 सहयोगी कर्मचारियों के हस्ताक्षर से दी गई तीन अलग-अलग तहरीरों के आधार पर धानेपुर थाने में एक स्थानीय पत्रकार उमा नाथ तिवारी के खिलाफ भादवि की धारा 353, 354, 384, 504, 506, 509 व अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) व 3(2) के तहत अभियोग दर्ज करवाया गया है। घटना की विवेचना क्षेत्राधिकारी सदर को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि नवजात के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण श्वांसावरोध बताया गया है। हालांकि यहां यह स्पष्ट नहीं है कि श्वासावरोध बच्चे के जन्म से पूर्व हुआ या बाद में। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. रश्मि वर्मा ने कहा कि जन्म से पूर्व ही बच्चे द्वारा गंदा पानी पी लिए जाने के कारण मृत्यु होना संभावित है। इस बीच प्राथमिकी दर्ज होने से आक्रोशित पत्रकारों ने पत्रकार संघर्ष समिति के बैनर तले मंगलवार को गांधी पार्क में एक बैठक करके प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह व सूचना को एक मांग पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। पत्रकारों का आरोप है कि एक गंभीर घटना से दबाव में आईं चिकित्सा अधीक्षक डा. सुमन मिश्रा ने पूरे पत्रकार समुदाय पर दवाब बनाने के मकसद से अपने सहयोगियों की तरफ से अभियोग दर्ज कराया है। वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह ने कहा कि डा. सुमन मिश्रा ने डीएम द्वारा गठित जांच टीम को बयान देकर मरा हुआ बच्चा पैदा होने तथा रात में ही उसे परिजनों के हवाले कर दिए जाने की बात कही गई है। साथ ही उन्होंने बच्चे को रात में वार्मर पर रखे जाने की बात भी कही है। ऐसे में दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती हैं? उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कराए गए नवजात के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उनके दावे की कलई खुल जाती है। बता दें कि पोस्टमार्टम रिपोट में बच्चे की मौत दम घुटने से होने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अधीक्षक ने अस्पताल में कार्यरत करीब 65 कर्मचारियों पर बेजा दबाव डालकर गवाह के रूप में उनका भी जबरन हस्ताक्षर करवाया है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में कभी भी किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक साथ 65 कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहते हैं। बताते चलें कि बीते 27 अगस्त की रात्रि में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुजेहना पर भर्ती कराई गई एक महिला ने उसी रात में एक शिशु को जन्म दिया था। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों की लापरवाही से नवजात की मौत होने का आरोप लगाते हुए अगले दिन सुबह अस्पताल में हंगामा किया था तथा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का अभियोग दर्ज करवा दिया था। साथ ही नवजात के चेहरे को किसी जीव द्वारा कुतरे जाने से शासन, प्रशासन में हड़कम्प मच गया था। डीएम के निर्देश पर सीडीओ व सीएमओ की संयुक्त जांच टीम द्वारा चिकित्सा प्रशासन को निर्दोष साबित करने के अगले दिन पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से एक बार फिर गुत्थी उलझती नजर आ रही है।
नवजात की मौत के मामले में पत्रकार पर मुकदमा
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