लखनऊ ( हि.स.)। दीपावली से एक दिन पूर्व 03 नवम्बर को नरक चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा। हिन्दी कैलेण्डर के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसे रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इसे रूप निखारने के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। चतुर्दशी तिथि 3 नवम्बर को प्रातः 9 बजकर 2 मिनट से प्रारम्भ होकर दूसरे दिन 4 नवंबर को प्रातः 6 बजकर 3 मिनट तक रहेगी।
धार्मिक परम्परा
ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल बताते हैं कि रूप चतुर्दशी के दिन सूर्याेदय के पूर्व उठकर तिल के तेल से मॉलिश करके स्नान करना चाहिए। उसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण के निमित्त दीपक जलाकर लम्बी आयु और आरोग्य की प्रार्थना करनी चाहिए। अपने सुख-समृद्धि हेतु प्रार्थना करें। सांयकाल महालक्ष्मी और कुबेर के निर्मित दीपक प्रज्वलित कर उनके मंत्रों का जाप करें और आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करें।
शाम को यहां-यहां रखे दीपक
पूजन धर्मग्रंथों के अनुसार इस तिथि में सूर्योदय से पूर्व तिल के तेल से माॅलिश कर स्नान करना चाहिए। उसके बाद यमराज के निमित्त तिल से तीन-तीन तिलांजलि भी देनी चाहिए। शाम को घर के स्नानगृह, नाली के पास, मंदिर, नदी के तट पर, बावली, बगीचा, कुंआ इत्यादी स्थानों पर तेल के दीपक को रखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज का भय रहता है।
घर की करे सफाई
व्यवहार में लोग इस दिन अपने घरों की सफाई करते है। घर का सारा कचड़ा निकाल बाहर फेंक देते हैं। जो लोग सारे साल भी जहां सफाई नहीं करते हैं, वहां इस दिन सफाई करते हैं। लोग बाल कटवाते हैं। लोग अपने शरीर पर तेल लगाकर स्नान करते हैं। मान्यता से ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
पौराणिक मान्यता
इस त्योहार का संम्बध भगवान श्रीकृष्ण से भी है। पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि में भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध भी किया था।
