गाजियाबाद (हि. स.)। शहीद अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव हिसाली पहुंचा, जहां उन्हें हजारों नम आंखों ने अंतिम विदाई दी। हिसाली निवासी अमरीश त्यागी सेना में थे और 16 साल पहले वह लापता हो गए थे। पिछले दिनों 16 साल बाद उनका शव बरामद हुआ था। आज उन्हें पैतृक गांव में लाया गया, जहां पर राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
इससे पहले मंगलवार की सुबह को मेरठ हाईवे पर उनका पार्थिव शरीर के पहुंचने पर हजारों की संख्या में लोगों ने फूलों की वर्षा कर अपनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद अमरीश त्यागी अमर रहे,और जब तक सूरज चांद रहेगा, अमरीश त्यागी का नाम रहेगा, इस नारे से मानो आकाश गूंजता रहा।
गंग नहर से उनकी शव यात्रा शुरू हुई, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने भाग लिया। लोगों में शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लम्बी लाइन लगी रही। मुरादनगर के विधायक अजीत पाल त्यागी मुरादनगर ब्लॉक प्रमुख राजीव त्यागी ने पहुंचकर सैनिक अमरीश त्यागी के पार्थिव शरीर पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
हिसाली गांव निवासी अमरीश त्यागी सेना की ऑर्डिनेंस रेजीमेंट में तैनात थे। वह अपने तीन साथियों के साथ हिमालय पर्वत पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने गए थे। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद वापस लौटते समय हिमालय पर्वत के पास उनके साथ दुर्घटना हो गई , जिसमें चारों सैनिक शहीद हो गए थे। तीन सैनिकों के पार्थिव शरीर उसी समय मिल गए थे, लेकिन अमरीश त्यागी गहरी खाई में गिरने के कारण उनका पार्थिव शरीर नहीं मिल पाया था। 16 साल बाद उत्तराखंड की हरसिल स्थान पर बफीर्ली चोटी में उनका पार्थिव शरीर मिला था। इनकी पहचान उनके शरीर पर लगी नेम प्लेट से हुई थी, जिसकी सूचना अधिकारियों ने उनके परिजनों को दी थी।
