– दो महीने बाद सक्तेशगढ़ आश्रम पहुंचे स्वामी अड़गड़ानंद महाराज
मीरजापुर(हि.स.)। परमहंस आश्रम सक्तेशगढ़ में आयोजित सत्संग में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि जहां आपसी प्रेम और सद्भाव होता है, वहां सारे सुख होते हैं और जहां आपस में द्वेष और वैमनस्य होता है, वहां दुःख और विपत्ति का वास होता है।
उन्होंने कहा कि सुख-समृद्धि, प्रगति एवं विकास के लिए हमेशा सद्बुद्धि से काम लेकर ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर आपसी समरसता स्थापित हो सके। गीता के अध्ययन से उत्पन्न सुविचारों को आत्मसात कर शांति, एकता व आपसी भाई चारा स्थापित किया जा सकता है।
लगभग दो महीने मध्य प्रदेश के बरचर आश्रम में प्रवास के बाद स्वामीजी महाराज शुक्रवार को सड़क मार्ग से सक्तेशगढ़ आश्रम पहुंचे। वरिष्ठ संत नारद महाराज व अन्य संतों ने उनकी आगवानी की। आश्रम पहुंचने पर अड़गड़ानंद महाराज सीधे विश्राम के लिए चले गए। इसके बाद शाम को होने वाले सत्संग में उन्होंने अपने वचनामृत से अपने अनुयायियों को तृप्त किया। उन्होंने यथार्थ गीता को मानव मात्र का धर्मशास्त्र बताते हुए कहा कि समाज में फैली विसंगतियों और नकारात्मकता को दूर करने के लिए इसका अध्ययन हर किसी को करना होगा। कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण से आप शाश्वत धर्म की ओर बढ़ते हैं। उन्होंने मन को नियंत्रित कर माया और मोह रूपी दुर्गुणों से सभी को बचने की सलाह दी।
गिरजा शंकर
