नई दिल्ली । इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर ) देश में कोरोना की पहचान के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट पर जोर दे रहा है। किन्तु इसके नतीजे सटीक नहीं हैं और जिन मरीजों में यह रिपोर्ट नेगेटिव आती है वह कोरोना के वाहक बन सकते हैं।
आईसीएमआर का कहना है कि पिछले साल आरटी-पीसीआर पर ज्यादा जोर दिया गया था लेकिन इस बार ज्यादा जोर एंटीजन टेस्ट पर है क्योंकि इसका नतीजा जल्दी पता चल जाता है। रिजल्ट के बारे में जल्दी पता चलने पर जल्द आइसोलेशन कर सकते हैं। केंद्र सरकार की योजना जून माह में रोजाना 45 लाख कोरोना टेस्ट करने की है। आईसीएमआर के डीजी डॉ। बलराम भार्गव ने कहा कि बड़े शहरों में आरटी-पीसीआर पर फोकस किया जा रहा है क्योंकि वहां लैब हैं। फील्ड एरिया और रूरल एरिया में एंटीजन टेस्ट पर जोर है, क्योंकि 15 मिनट पर रिजल्ट आ जाता है।
भार्गव ने कहा कि हमारा सुझाव है कि ज्यादा रैपिड एंटीजन टेस्ट किए जाएं। जून माह में रोजाना 45 लाख टेस्ट करने की योजना है।
41 कंपनियों की रैपिड एंटीजन टेस्ट किट को अब तक अप्रूव्ड किया है।होम टेस्टिंग की एक किट को अप्रूवल मिल गया है और तीन और कंपनियों की किट पाइप लाइन में हैं। एक हफ्ते में वो भी उपलब्ध होगी। सभी का लगभग एक ही तरीका होगा। बाजार से किट खरीदें, ऐप डाउनलोड करें, निर्देश पढ़कर टेस्ट करें और फिर उसकी डिटेल क्लिक कर मोबाइल फोन ऐप में जानकारी दें
नई दिल्ली : रैपिड एंटीजन टेस्ट बढ़ाने पर है आईसीएमआर का जोर, लेकिन इसके नतीजे सटीक नहीं
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