लखनऊ (हि.स.)। नौ बजते-बजते सूरज का पारा 35 के पार पहुंच जा रहा है। ऐसे में किसानों की कठिनाइयां काफी बढ़ गयी है। धान की नर्सरी डाल चुके किसान काफी परेशान हैं। वहीं हरी सब्जियों की फसलें भी बढ़ नहीं पा रही हैं। वैज्ञानिकों की सलाह है कि धान की नर्सरी में हमेशा नमी बनाएं रखें। इस समय नर्सरी में खाद देने से भी बचना चाहिए। हमेशा यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि फसलों की सिंचाई दोपहर में न की जाय।
प्रगतिशील किसान गौरव का कहना है कि धान की नर्सरी पीले पड़ गये हैं। उसमें खाद व सिंचाई करने के बाद भी तेजी से बढ़ने का नाम नहीं ले रहा है। इससे चिंता काफी बढ़ती जा रही है। अगैती धान की फसलों के रोपाई के लिए देर हो रहा है, लेकिन बारिश की अभी संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में टूयबवेल भी जवाब दे रहे हैं।
इस संबंध में उद्यान अधिकारी डा. शैलेंद्र दुबे का कहना है कि अधिक तापमान बढ़ने के बाद मनुष्य भी यह सोचता है, जिंदा रहने भर खाया जाय, ज्यादा या ऊल-जुलुल खाने पर हाजमा तुरंत गड़बड़ होने की संभावना रहती है। वैसे ही फसलों में भी इस भीषण गर्मी में खाद डालने से बचना चाहिए। यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि उसमें नमी बनी रहे।
उन्होंने कहा कि तेज धूप या तेज हवा के समय खेतों की सिंचाई नहीं करनी चाहिए। इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। रात को सिंचाई करना ज्यादा उपयुक्त होता है। ऐसे मौसम में सब्जियों की सिंचाई पर ध्यान देने के साथ ही उनके फलों को मिट्टी से ऊपर करते रहना चाहिए। सिंचाई करते समय फलों पर मिट्टी चढ़ने से उसमें सड़न होने का खतरा बना रहता है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक कौशल कुमार का कहना है कि सब्जियों की खड़ी फसल में निराई-गुड़ाई करें तथा शाम को तीन से चार दिन के अन्तराल पर सिंचाई का कार्य करें। गर्मी में बोई जाने वाली कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, खीरा, खीरा, तरबूज, खरबूजा आदि की तैयार फसलों को काटकर बाजार में भेज दें। सब्जी फसलों में फल छेदक और पत्ती छेदक कीट की रोकथाम के लिए नीम के तेल को 1.5-2.0 मिली लीटर पानी में घोल बनाकर हर सप्ताह छिड़काव करते रहें।
उपेन्द्र/मोहित
