Friday, February 13, 2026
Homeविधि एवं न्यायदोनों पक्ष से वकालतनामा दाखिल करने पर कोर्ट नाराज, मामले को भेजा...

दोनों पक्ष से वकालतनामा दाखिल करने पर कोर्ट नाराज, मामले को भेजा बार काउंसिल को

प्रयागराज (हि.स.)। हाईकोर्ट में दाखिल जमानत प्रार्थनापत्र में दूसरे पक्ष की ओर से भी खुद ही वकालतनामा दाखिल करवाने वाले वकील पर हाईकोर्ट ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को कहा है कि वह इस मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करें।

कोर्ट ने इस प्रकार से फर्जी वकालतनामा दाखिल कर वकालत के श्रेष्ठ व्यवसाय की गरिमा गिराने को दुखद बताते हुए सुझाव दिया है कि वकालतनामा के साथ इस पर दस्तखत करने वाले का आईडी प्रूफ और मोबाइल नंबर भी दिया जाए। इस बात पर आश्चर्य जताया कि बचाव पक्ष के वकील ने शिकायकर्ता की ओर से भी खुद ही वकील खड़ा कर दिया और अदालत में कहा कि जमानत मंजूर किए जाने पर शिकायतकर्ता को कोई आपत्ति नहीं होगी। बुलंदशहर के जावेद अंसारी की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने सुनवाई की। जावेद के खिलाफ कोतवाली थाने में दुष्कर्म, और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

कोर्ट ने कहा कि विधि के श्रेष्ठ व्यवसाय में कानून का राज कायम रखने और कानून की संस्थाओं को सबसे ऊंचे पायदान पर रखने के लिए व्ययसयिक नैतिकता बुनियाद है। यह काफी पीड़ादायक है कि विधि व्यवसाय में गिरावट देखने को मिल रही है। कोर्ट ने कहा कि विधि व्यवसाय में बार और बेंच के बीच भरोसा बनाए रखने के लिए नैतिकता अहम तथ्य है। इसमें अनुशासन, पारदार्शिता, विश्वास और नैतिक मूल्य के तत्व होने चाहिए। व्यवसायिक नैतिकता विधि व्यवसाय की रीढ़ है। सहयोगियों की मदद करने और अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करना आवश्यक है।

कोर्ट ने कहा कि वकालतनामा महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जो अधिवक्ता को उसके मुव्वकिल की ओर से काम करने का अधिकार देता है। इसलिए अदालत की राय में वकालतनामा संदेह से परे होना चाहिए। फर्जी वकालतनामा दाखिल करना कोई छोटी बात नहीं है, यह काफी गम्भीर मामला है जो किसी वादकारी के विधिक अधिकार पर विपरीत असर डाल सकता है।

आईडी प्रूफ के साथ दाखिल हो वकालतनामा

कोर्ट ने प्रस्ताव दिया है कि वकालतनामा के साथ उस पर दस्तखत करने वाले व्यक्ति का पहचान पत्र विशेषतः आधार कार्ड और मोबाइल नंबर भी दिया जाना चाहिए। या कोई दूसरा रास्ता निकाला जाए ताकि फर्जी वकालतनामा दाखिल करने से रोका जा सके। कोर्ट ने महानिबंध को निर्देश दिया है कि इस आदेश की सत्यापित प्रति बार कौंसिल के चेयरमैन को भेंजे और चेयरमैन उस पर उचित कार्यवाही करें। कोर्ट ने आदेश की प्रति सभी जजों और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी भेजने के लिए कहा है। साथ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

जमानत अर्जी दाखिल करने वाले जावेद अंसारी की ओर से त्रिभुवन उपाध्याय हाल में चैंबर नंबर नौ में बैठने वाले अधिवक्ता रामकेर सिंह कोर्ट प्रस्तुत हुए। वहीं शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता हौसला प्रसाद उपस्थित थे। हौसला प्रसाद भी रामकेस सिंह के चैंबर से ही संबद्ध हैं और वहीं बैठते हैं। अर्जी बहस के दौरान रामकेर सिंह ने कोर्ट से कहा कि यदि अदालत जमानत मंजूर करती है तो शिकायतकर्ता के वकील को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। हौसला प्रसाद ने भी शिकायकर्ता के वकील के तौर पर कहा कि उनको कोई आपत्ति नहीं है। इसी दौरान एक अन्य अधिवक्ता विवेक कुमार सिंह ने उपस्थित होकर बताया कि वह शिकायतकर्ता के वकील हैं और हौसला प्रसाद का वकालतनामा फर्जी है। कोर्ट के पूछने पर हौसला प्रसाद ने बताया कि उनको रामकेर सिंह ने ही आबद्ध किया है और वकालतनामा जो उन्होंने दाखिल किया वह रामकेर ने उपलब्ध कराया था। तथा फीस भी रामकेर सिंह ने ही दी है।

हौसला प्रसाद ने बिना शर्त माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसा नहीं करने का वादा किया जबकि रामकेर सिंह ने माफी नहीं मांगी, बल्कि उनका कहना था कि हाईकोर्ट में यह आम चलन है ताकि कोर्ट शिकायकर्ता को नोटिस जारी न करे। कोर्ट ने कहा कि यह बयान काफी स्तब्ध करने वाला और पीड़ादायक है। दोनों वकीलों के पास 40 वर्ष और 26 वर्ष का लंबा अनुभव है। कोर्ट ने माफी मांग लेने के कारण हौसला प्रसाद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, मगर रामकेर सिंह के खिलाफ कार्रवाई का बार कौंसिल को निर्देश दिया है।

RELATED ARTICLES

Most Popular