Monday, March 30, 2026
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दूसरों की पीड़ा को अपनी समझने वाले लोग थे स्वतंत्रता सेनानी: सतीश महाना

– भारत को तोड़ने वालों का नहीं बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए: प्रो. योगेश सिंह

– यूपी विधानसभा अध्यक्ष और डीयू कुलपति ने किया प्रो. के.एल. जोहर की पुस्तक “उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी” का विमोचन

नई दिल्ली (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि दूसरों की पीड़ा को अपनी समझने वाले लोग ही सही मायनों में स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके बलिदानों के कारण ही आज हम लोग इन पदों पर बने हुए हैं। सतीश महाना दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों’ पर आधारित पुस्तक के विमोचन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सतीश महाना और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह द्वारा संयुक्त रूप से “उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी” पुस्तक के दो भागों का विमोचन किया गया। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के पूर्व कुलपति प्रो. के.एल. जोहर द्वारा लिखित उक्त पुस्तक का विमोचन समारोह मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हॉल में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि इन पुस्तकों का उद्देश्य राष्ट्रभक्त स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति आदर का भाव पैदा करना है। उन्होंने कहा कि भारत को तोड़ने वालों का नहीं बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए।

मुख्यातिथि सतीश महाना ने कहा कि आजादी की लड़ाई केवल कुछ ही लोगों नें नहीं लड़ी, बल्कि इसमें सबका अपना-अपना योगदान था। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्होंने अपनी जान दी, उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचने के लिए हिंसा करना नहीं था। भगत सिंह द्वारा असेंबली में बम फेंकने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह धमाका केवल आवाज पैदा करने के लिए था, न कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए। महारानी लक्ष्मी बाई, अजीजन बाई, झलकारी देवी और नीरा आर्य जैसी महिलाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि शहीदों को बाउंड्री के अंदर नहीं बांधा जा सकता; ये सभी एक तार से जुड़े होते हैं।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि 200-250 दिनों में 207 स्वतंत्रता सेनानियों पर 2 भागों में इतनी बड़ी किताब लिखना बहुत बड़ी बात है। कुलपति ने इसके लिए प्रो. के.एल. जोहर को बधाई देते हुए कहा कि 87 वर्ष की उम्र में यह लेखन उनकी मेहनत, लगन, सोच और कृतज्ञता भाव की देन है। वीर दामोदर सावरकर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को दो जन्मों की सजा हुई, जिसने जीवन भर देश के लिए काम किया उससे परहेज क्यों? उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सिलेबस में सावरकर को पढ़ाने का फैसला लिया गया है। कुलपति ने कहा कि यह 21वीं सदी का भारत है, इसमें युवा पीढ़ी को ऐसे तैयार करना है जोकि 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बना सके। इसमें प्राध्यापकों की भूमिका अहम होगी।

“उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी” पुस्तक के लेखक प्रो. के.एल. जोहर ने पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी में लिखी गई यह पुस्तक दो भागों में है। पुस्तक में उत्तर प्रदेश के उन 207 व्यक्तियों का जीवन चरित्र प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुशील/अनूप

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