मेरठ(हि.स.)। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद से मेरठ नगरीय निकाय के चुनावों में टिकट को लेकर भाजपा पर दबाव बढ़ गया है। अभी तक पुराने पार्षदों के टिकट काटने की नीति को लेकर भाजपा में फिर से मंथन शुरू हो गया है।
कई बार के नगर निगम पार्षदों का टिकट काटने की नीति पर भाजपा में फिर से विचार शुरू हो गया है। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत से भाजपा नेतृत्व ने चिंतन शुरू कर दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कई नेताओं के भाजपा छोड़कर जाने के बाद बने माहौल में भाजपा के कई विधायकों के टिकट बच गए थे। इससे पहले बेहतर परफार्मेंस नहीं करने वाले भाजपा विधायकों के टिकट काटने पर पार्टी में सहमति बन गई थी। वैसी ही स्थिति दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद बन रही है। पार्टी में असंतोष, भीतरघात, बागी उम्मीदवारों से बचने के लिए भाजपा में पुराने पार्षदों के टिकट काटने की नीति पर फिर से मंथन शुरू हुआ है। राजनीतिक विश्लेषक भी इस सियासी दबाव से इनकार नहीं कर रहे हैं।
विरोधी दल उठाएंगे इस परिस्थिति का फायदा
दिल्ली से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद आदि नगर निगम में भाजपा की स्थिति बेहतर मानी जा रही है। हालांकि 2017 में मेरठ नगर निगम में महापौर पद पर भाजपा को हार झेलनी पड़ी थी, लेकिन इस बार भाजपा की राह आसान मानी जा रही है। जिस तरह से दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम आए हैं, उसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पड़ने के आसार भी है। ऐसे में भाजपा के सामने उत्पन्न हुई स्थिति का विरोधी दल फायदा उठाने में जुट गए हैं। खासकर सपा और बसपा इस स्थिति में अपनी चांदी देख रहे हैं।
पुराने पार्षद ले सकते हैं राहत की सांस
भाजपा में मेरठ नगर निगम के कई वरिष्ठ पार्षद भी हैं,जो दो से लेकर चार बार पार्षद रह चुके हैं। इन पार्षदों का टिकट कटना तय माना जा रहा है। इनके स्थान पर भाजपा युवा कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि दिल्ली एमसीडी के चुनाव परिणाम के बाद वरिष्ठ पार्षदों को टिकट के स्तर पर राहत मिल सकती है।
कुलदीप
