Tuesday, March 31, 2026
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दहेज कुप्रथा रोकने को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने चलाया देशव्यापी अभियान

– तीन दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी करेंगे

नई दिल्ली (हि.स.)। दहेज उत्पीड़न की शिकार अहमदाबाद की आयशा खान के साबरमती नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड काफी सक्रिय दिखाई पड़ रहा है। बोर्ड की तरफ से मुस्लिम समाज में बढ़ रहे दहेज के चलन को रोकने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है। बोर्ड की तरफ से तीन दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन 20 से 21 मार्च के बीच आयोजित करने का फैसला लिया गया है जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी करेंगे।
बोर्ड के सचिव मौलाना मोहम्मद उमरैन ने हिन्दुस्थान समाचार से एक विशेष बातचीत के दौरान बताया कि इस ऑनलाइन सम्मेलन को बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी सहित दर्जन भर से ज्यादा उलेमा और बुद्धिजीवी संबोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि मुस्लिम समाज में दहेज का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। दहेज की इस लानत की वजह से मुस्लिम समाज में बेशुमार बुराईयां पैदा होती जा रही हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की इस्लाह-ए-मआशरा कमेटी ने मुस्लिम समाज में व्याप्त होने वाली इन बुराइयों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर जागरुकता अभियान चलाने का फैसला लिया है। इस अभियान के तहत कई राज्यों में छोटे-छोटे जलसों का आयोजन किया जा चुका है। अब एक तीन दिवसीय सम्मेलन करने का फैसला बोर्ड ने लिया है। यह सम्मेलन 20 से 22 मार्च के बीच आयोजित किया जाएगा। 
सम्मेलन को बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी और महासचिव मौलाना वली रहमानी के साथ-साथ दर्जनभर से अधिक उलेमा और बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन का विषय ‘आसान और मसनून शादी शरीयत की पहली पसंद’ रखा गया है। मौलाना ने बताया कि सम्मेलन को बोर्ड के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर लाइव भी किया जाएगा। सम्मेलन के माध्यम से बोर्ड का मकसद है कि अपनी बात को बड़ी तादाद में मुसलमानों के सभी वर्गों तक पहुंचाना है ताकि इसका फायदा आने वाले समय में दिखाई पड़े। 
मौलाना का कहना है कि अहमदाबाद की आयशा खान आत्महत्या की घटना ने मुस्लिम समाज को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। मुस्लिम समाज में दहेज की कुप्रथा यहां रह रहे अपने हमवतनों में पहले से चल रही परंपरा से मुसलमानों में आई है जिसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है। इस्लाम में निकाह को बहुत ही आसान और सरल बनाया गया है लेकिन कुछ लालची लोगों ने अपने स्वार्थी हितों के कारण इसे काफी जटिल बना दिया है। इसकी वजह से हमारी बेटियां निकाह के बिना घरों में बैठी हुई हैं। बोर्ड का मकसद है कि इस अभियान के तहत दहेज और पैसे के कारण घरों में बैठीं ऐसी तमाम बेटियों के निकाह के लिए आसानी पैदा की जाए और नौजवानों को इसके लिए प्रेरित किया जाए।

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