विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट ने मुख्य आरोपी की जमानत अर्जी किया खारिज
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। जिले की एक अदालत ने शनिवार को एक दलित युवती का अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म करने तथा उसका धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह करने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
विशेष लोक अभियोजक केपी सिंह ने बताया कि जिले के परसपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक 21 वर्षीय दलित युवती से गांव का ही मुंबई में रहने वाला एक युवक फोन पर बात किया करता था। वह युवती को शादी का झांसा देकर बार-बार मुम्बई बुलाता था। युवती 14 जून 2022 को सायंकाल जब शौच करने के लिए घर से बाहर गयी, तो युवक ने उसे कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया। युवती को जब होश आया, तो वह मुम्बई स्थित किसी कमरे में थी, जो शायद जावेद का था। जावेद द्वारा हाफिज को बुलाकर युवती का धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करा दिया गया। विरोध करने पर धमकाया व मारा गया। मुम्बई में रह रहे महमूद, इबरार व स्वयं जावेद द्वारा बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया गया। सिंह के अनुसार, इस संबंध में युवती के भाई द्वारा थाने में भादवि की धारा 366, 376डी, 323, 338, 504, 506 व धारा 3(2)(v), 3(2)(va), 3(1)द व 3(1) एससीएसटी एक्ट तथा धारा-3. 5 (1) धर्म परि अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज कराए जाने पर उसे 21 जून 2022 को करनैलगंज रेलवे स्टेशन छोड़ दिया गया तथा उसे गाली दी गयी। उन्होंने बताया कि प्रकरण में नामजद मुख्य अभियुक्त मो. अहमंद उर्फ बहादुर की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिस पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) नासिर अहमद ने अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान विशेष लोक अभियोजक केपी सिंह को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए जमानत याचिका निरस्त कर दिया।
