Thursday, April 2, 2026
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दबाव, धोखा या लालच से धर्म परिवर्तन मामले को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गंभीर

नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने दबाव, धोखा या लालच से धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून की मांग पर अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी को सहायता के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर बताया। कोर्ट ने इसे याचिकाकर्ता के नाम की जगह विषय के नाम से लिखने का आदेश दिया। अब इसे issue of religious conversion के नाम से लिखा जाएगा।

इससे पहले 5 दिसंबर 2022 को कोर्ट ने कहा था कि जो गरीबों की मदद करना चाहता है, जरूर करे, लेकिन इसका मकसद धर्म परिवर्तन करवाना नहीं हो सकता है। इस मामले में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि यह एक गंभीर विषय है और इस तरह का कानून जरूरी है।

केन्द्र सरकार ने अपने हलफनामा में कहा है कि नौ राज्यों ने ऐसा कानून बनाया है। सरकार का कहना है कि “पब्लिक ऑर्डर” राज्य सूची का विषय है। नौ राज्यों ने इसको रोकने के लिए कानून भी बनाया है। इन राज्यों में ओडिशा, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हरियाणा शामिल है। केंद्र सरकार ने कहा कि वो याचिका में उठाई गई मांगों को ध्यान में रखते जरूरी कदम उठाएगी।

कोर्ट ने 23 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में ईसाई बनने का दबाव बनाए जाने के चलते आत्महत्या करने वाली तमिलनाडु की लावण्या मामला समेत दूसरी घटनाओं का हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में निचले तबके के लोगों खासकर अनुसूचित जाति और जनजातियों के लोगों के धर्मांतरण में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। धर्मांतरण के लिए हमेशा आर्थिक रूप से कमजोर तबके को टारगेट किया जाता है।

याचिका में कहा गया है कि यह अपने धर्म के प्रचार-प्रसार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है । भारत में सदियों से धर्मांतरण जारी है। इसे रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। याचिका में कहा गया है कि विदेशी चंदे पर चलने वाले एनजीओ को धर्मांतरण के लिए मासिक टारगेट दिया जाता है। अगर सरकार इसके खिलाफ कदम नहीं उठाती है तो देश में हिन्दू अल्पसंख्यक हो जाएंगे।

संजय

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