Tuesday, March 31, 2026
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 दक्षिण चीन सागर में गुजरे चीनी जहाजों को भारत ने अपनी निगहबानी में रखा

– भारत आसियान समुद्री अभ्यास के दौरान बेहद करीब से गुजरे चीनी नौसेना के जहाज

– आसियान देशों के युद्धपोतों ने भी चीनी जहाजों पर नजर रखने में भारत का साथ दिया

नई दिल्ली (हि.स.)। भारत आसियान समुद्री अभ्यास के दौरान दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना की नजर चीनी जहाजों पर रही। भारत के विध्वंसक युद्धपोत आईएनएस दिल्ली और स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा ने लगभग 100 समुद्री मील (185 किमी.) दूर तक चीनी जहाजों को अपनी निगहबानी में रखा। यह दोनों जहाज समुद्री अभ्यास में हिस्सा लेने सिंगापुर के चांगी नेवल बेस गए थे। इस अभ्यास का दो दिवसीय समुद्री चरण दक्षिण चीन सागर में 8 मई को पूरा हुआ है।

सिंगापुर के चांगी नेवल बेस में 02 मई से आसियान देशों का पहला समुद्री अभ्यास शुरू हुआ था, जिसका उद्घाटन भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार और सिंगापुर नौसेना प्रमुख एडमिरल सीन वाट ने संयुक्त रूप से किया था। भारत के युद्धपोत आईएनएस दिल्ली और आईएनएस सतपुड़ा समुद्री अभ्यास में भाग लेने के लिए सिंगापुर गए थे। अभ्यास का बंदरगाह चरण 2-4 मई तक चांगी नौसेना बेस में और समुद्री चरण दक्षिण चीन सागर में 7-8 मई तक हुआ। ड्रिल में नौ जहाज, छह विमान और आसियान देशों और भारत के 1,800 से अधिक कर्मचारी शामिल थे।

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि चीनी निगरानी पोत जियांग यांग होंग 10 और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) के कम से कम आठ समुद्री मिलिशिया जहाज उस क्षेत्र की ओर रवाना हुए, जहां आसियान-भारत नौसैनिक अभ्यास का समुद्री चरण सोमवार को समाप्त हुआ है। इसके बाद चीनी जहाज वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की ओर चले गए, लेकिन भारतीय नौसेना ने लगभग 100 समुद्री मील (185 किमी.) दूर तक चीनी जहाजों को अपनी निगहबानी में रखा। इस तरह पहला भारत-एशिया अभ्यास दक्षिण चीन सागर में सफलतापूर्वक समाप्त हो गया और क्षेत्र में चीनी जहाजों की मौजूदगी से प्रभावित नहीं हुआ।

चीनी जहाजों की मौजूदगी की सूचना सोशल मीडिया पर सबसे पहले अमेरिकी वायु सेना के पूर्व अधिकारी रे पॉवेल ने दी थी, जो स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में गॉर्डियन नॉट सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी इनोवेशन के लिए दक्षिण चीन सागर में विकास को ट्रैक करते हैं। पॉवेल ने कहा कि पांच चीनी समुद्री मिलिशिया जहाज स्प्रैटली द्वीप समूह से भारत-आसियान ड्रिल के क्षेत्र में चले गए। अन्य तीन चीनी समुद्री मिलिशिया जहाज सूबी रीफ से निकलकर अभ्यास क्षेत्र की ओर बढ़े। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन चीनी जहाज़ों का उद्देश्य नौसैनिक अभ्यास पर नजर रखना था या वियतनाम के ईईजेड में प्रवेश करना था, जहां चीन समुद्री विवाद में उलझा हुआ है।

चीनी जहाजों पर निगरानी रखने के लिए अभ्यास में शामिल भारतीय युद्धपोत ने अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) को बंद कर दिया था। ऐसा ही आसियान देशों के अन्य युद्धपोतों ने भी करके चीनी जहाजों पर नजर रखने के लिए भारत का साथ दिया। इसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। आसियान देशों के लिए अपने हित के क्षेत्रों में सैन्य अभ्यास और अन्य गतिविधियों पर नजर रखना असामान्य नहीं है। चीनी पक्ष ने दक्षिण चीन सागर में अपनी मजबूत उपस्थिति स्थापित करने की मांग की है, जहां वह ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ समुद्री विवादों में लगा हुआ है।

सुनीत/पवन

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