Monday, April 6, 2026
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…तो क्या बसपा बचा पाएगी ‘चिल्लूपार सीट’, डेढ़ प्रतिशत अंतर से मिली थी जीत

– भाजपा के राजेश त्रिपाठी को 03 हजार 359 वोटों के अंतर से देखना पड़ा था हार का मुंह

गोरखपुर (हि.स.)। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर जिले की चिल्लूपार विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नहीं जीत सकी थी। यहां बसपा के प्रत्याशी और बाहुबली हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी ने बाजी मारी थी। हम इसे यूं भी कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चिर प्रतिद्वंद्वी कहे जाने वाले हरिशंकर तिवारी के परिवार का सिक्का यहां जम गया था। उनके बेटे विनय शंकर तिवारी ने बसपा प्रत्याशी के रूप में विजय हासिल की थी, लेकिन अब बदलती राजनैतिक परिस्थितियों के बीच यह सवाल कौंध रहा है कि क्या चिल्लूपार विधानसभा सीट को बसपा बचाये रख पाएगी?

पिछले चुनाव में गोरखपुर की 09 में 08 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया था। चिल्लूपार की सीट बसपा के खाते में गई थी। यह वह समय था जब मोदी लहर चल रही थी। दूसरी बात यह कि तब योगी आदित्यनाथ भी मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं थे। लेकिन अब यह राजनैतिक संघर्ष योगी आदित्यनाथ के चिर प्रतिद्वंद्वी हरिशंकर तिवारी के परिवार से सीधे है। हरिशंकर तिवारी का कुनबा भी हार स्वीकारने के मूड में नहीं है और अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। ऐसे में यह सीट न सिर्फ भाजपा के लिए बल्कि बसपा का लिए भी नाक का विषय बन गई है।

इधर, भाजपा ने यूपी के इस चुनाव का चेहरा योगी आदित्यनाथ को बना रखा है और यह हरिशंकर तिवारी के परिवार और समर्थकों के जतई नहीं सुहा रहा है। ऐसे में यहां रोचक मुकाबला देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है। यदि यहां बसपा का समीकरण गड़बड़ाया तो योगी लहर को नकारा नहीं जा सकता है।

वर्ष 2017 में चिल्लूपार में कुल 35.48 प्रतिशत वोट पड़े थे। बहुजन समाज पार्टी से विनय शंकर तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी के राजेश त्रिपाठी को 03 हजार 359 वोटों के मार्जिन से हराया था। बसपा की जीत का यह मार्जिन केवल 01.50 प्रतिशत ही था।

आमोद

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