– 24 घंटे में 40 हजार से अधिक पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) गुजरने पर ही कोई सड़क हो सकती है सिक्सलेन
– सर्वे में गोरखपुर बाईपास पर ट्रैफिक लोड 32 से 35 हजार ही मिला था
– प्रस्ताव ज्यादा और बजट कम होने से भी निरस्त होती हैं योजनाएं
गोरखपुर (हि.स.)। गोरखपुर बाईपास के सिक्सलेन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है। इसके निरस्त होने के कारणों के बारे में अभी कुछ भी कहने से अधिकारी कन्नी काट रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसे सर्वे समाने आये हैं जिसके आधार पर इसके निरस्त होने की पुख्ता वजहें कहीं जा सकती हैं।
प्रस्ताव भेजने के बाद एनएचएआई गाेरखपुर ने रोड के ट्रैफिक लोड का सर्वे किया था। सर्वे के मुताबिक यह रोड फोरलेन से सिक्सलेन किये जाने के मानक से कम मिला था। वजह, किसी सड़क को सिक्सलेन बनाने के लिए उस पर 24 घंटे में 40 हजार से अधिक पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) होना चाहिए। लेकिन सर्वे के दाैरान गोरखपुर बाईपास पर ट्रैफिक लोड 32 से 35 हजार ही मिला था।
इसके अलावा कालेसर से तीन सड़कें निकलती हैं, गोरखपुर बाईपास, जंगल कौड़िया बाईपास व गोरखपुर शहर का प्रवेश द्वार। वहां से ट्रैफिक तीन तरफ डायवर्ट हो जाता है, जिससे शहर में आने वाला ट्रैफिक लोड बंट जाता है। इसके अलावा प्रस्ताव ज्यादा होने और बजट कम होने के कारण भी कई बार योजनाएं निरस्त होती हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं में से किसी एक वजह से योजना निरस्त हुई है। एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों को योजना निरस्त होने की स्पष्ट जानकारी नहीं है।
गोरखपुर एनएचएआई के परियोजना निदेशक भावेश अग्रवाल के मुताबिक गोरखपुर बाईपास का प्रस्ताव निरस्त हो गया है। सूचना आ गई है, लेकिन मुख्यालय ने निरस्त होने के कारणों को नहीं बताया है। इसके कई कारण हो सकते हैं। फिलहाल उनकी चर्चा करना मुनासिब नहीं है।
डा. आमोदकांत
