वाराणसी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को विपक्षी नेताओं के जिन्ना प्रेम पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो जिन्नावादी, तालिबानी सोच है। वह प्रदेश की राजनीति में अब नहीं चलेगी। तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों के दिन अब पूरे हो गए हैं। जो भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी सोच के खिलाफ काम करेगा, उसके लिए यहां कोई जगह नहीं है। प्रदेश में जातिवाद, संप्रदायवाद और भाई-भतीजावाद नहीं सिर्फ विकासवाद ही चलेगा।
भाजपा के प्रदेश स्तरीय संगठनात्मक बैठक में शामिल होने आये उप मुख्यमंत्री डॉ शर्मा मीडिया कर्मियों से रूबरू थे। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि मौसमी रामभक्त आए थे। कुछ समय रामनामी दुपट्टा पहन कर ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर’ का पाठ करके घंटा बजाया। फिर अपने पुराने ढर्रे पर फिर लौट गए। जो राम और राम सेतु को काल्पनिक बता रहे थे, वे रामभक्त नहीं हो सकते। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की सहयोगी रही सुभासपा और समाजवादी पार्टी केे गठबंधन और दोनों दलों के नेताओं के आक्रामक तेवर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा इसे 2017, 2019 और उससे पहले के उपचुनाव के रूप में देखती है जब 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा व कांग्रेस ने गठबंधन किया था और बसपा ने बाहर से समर्थन किया था। इसे इतिहास का सबसे मजबूत गठबंधन के नाम से प्रचारित किया गया। लेकिन क्या हश्र हुआ।
इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा का गठबंधन हुआ। इसमें कांग्रेस ने बाहर से समर्थन किया, मिलकर तीनों लड़े लेकिन हार गये। इस बार भी ये हारेंगे। सुभासपा सपा के गठबंधन को टीएमसी का समर्थन मिलने से जुड़े सवाल पर डॉ शर्मा ने कहा कि बंगाल में जो हिंसा, आतंक व तुष्टिकरण की राजनीति है। उसे अगर ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश में करने की सोच रही हैं तो यहां की जनता इसे स्वीकार नहीं करने वाली है। हां, बाहर की शक्तियां भी आ रही हैं। महाराष्ट्र की एक पार्टी भी चुनाव में लड़ने का दावा कर रही है। हैदराबाद से भी कुछ लोग संप्रदाय विशेष की राजनीति करने का सपना देख रहे हैं लेकिन यूपी में इनकी दाल नहीं गलने वाली ।
