शैलेंद्र मिश्र ने दायर की थी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। श्रीराम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि के निर्धारण के लिए सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई जनहित याचिका पर सोमवार (22 जनवरी) को सुनवाई होगी। यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या में निर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दिन ही उनके अनन्य भक्त की जन्मस्थली के निर्धारण के लिए सर्वोच्च अदालत ने वही तिथि निर्धारित कर दिया है। यह जानकारी देते हुए मुकदमे के याची तथा श्रीलाल बहादुर शास्त्री डिग्री कालेज गोंडा में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने आज यहां बताया कि सोमवार को सुप्रीम अदालत के कोर्ट नम्बर पांच में डबल बेंच के न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस और संजय कुमार मामले की सुनवाई करेंगे। प्रो. मिश्र ने बताया कि किसी व्यक्ति का जन्म स्थान कहीं एक जगह ही हो सकता है, लेकिन गोस्वामी जी की लोकप्रियता के चलते उत्तर प्रदेश के नौ जनपदों के लोगों ने उनका जन्म स्थान अपने यहां बता दिया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के सभापति व वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने अपने शोध के उपरांत उनके जन्म स्थान को तीन स्थानों तक सीमित कर दिया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार ने गोंडा, बांदा व एटा जिलों को गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म भूमि के रूप में मान्यता दे रखी है। याची का तर्क है कि कोई व्यक्ति तीन स्थानों पर पैदा नहीं हो सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मभूमि निर्णय की तर्ज पर उनके अनन्य भक्त श्रीराम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि का भी निर्धारण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण- प्रतिष्ठा के दिन ही गोस्वामी जी के जन्मभूमि के निर्धारण की प्रक्रिया शुरु होना खुशी की बात है। कालेज के शोध केंद्र के निदेशक प्रो. मिश्र ने बताया कि याचिका में गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि गोण्डा जिले में होने से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण तथ्य एवं अभिलेख याचिका के साथ दाखिल किए हैं। अदालत में अनुसुइया चौधरी व अन्य उनकी तरफ से पैरवी कर रहे हैं।
