इंटरनेशनल डेस्क
बीजिंग। लिथुआनिया सरकार द्वारा ताइवान को लिथुआनिया में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की इजाजत देने से चीन भड़क गया है। चीन ने अब लिथुआनिया की राजधानी विनियस से अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने लिथुआनिया के फैसले का विरोध करते हुए कहा, ’सरकार ने लिथुआनिया से चीनी राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है और लिथुआनियाई सरकार से चीन से अपने राजदूत को वापस बुलाने को कहा है।’ चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन की ओर से कई बार कहने और चेतावनियों के बावजूद लिथुआनियाई सरकार ताइवान प्रशासन को प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की इजाजत देगी। लिथुआनियाई सरकार ने दोनों देशों के बीच स्थापित राजनयिक संबंधों का उल्लंघन किया है। ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने जुलाई में घोषणा की थी कि ताइवान अक्टूबर या नवंबर में विनियस में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलेगा। वू ने कहा था कि ताइवान और लिथुआनिया की सरकारें अपनी-अपनी राजधानियों में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने के लिए सहमत हैं। इसे यूरोप में ताइवान का दूसरा प्रतिनिधि कार्यालय कहा जाता है। ताइवान ने 2003 में यूरोप के स्लोवाकिया में पहला ऑफिस खोला था। इससे पहले लिथुआनियाई विदेश मंत्री गेब्रियलियस लैंड्सबर्गिस ने बताया था, ’ताइवान और अन्य एशियाई देशों में एक प्रतिनिधि कार्यालय की स्थापना का उद्देश्य चीन का मुकाबला करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में इंडो-पेसिफिक क्षेत्र तक पहुंचना है।’ बता दें कि चीन, ताइवान पर पूर्ण संप्रभुता का दावा करता है। इस तथ्य के बावजूद कि दोनों पक्ष सात दशकों से अधिक समय से अलग-अलग शासित हैं।
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