Friday, April 10, 2026
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तल्ख धूप और पुरवा हवाओं ने छीना चैन,उमस और गर्मी से लोग बेहाल

मानसून आने में अभी एक सप्ताह की देरी,बच्चों और बुर्जुगों को सावधानी बरतने की जरूरत

वाराणसी (हि.स.)। वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में लोग दिन में गर्म हवा, चिलचिलाती तल्ख धूप से बेहाल है। तो शाम को भी गर्मी और उमस से राहत नही मिल रही। मौसम के तल्ख मिजाज से राहत पाने के लिए लोग सुबह शाम स्नान के साथ ठंडे पेय लस्सी और कोल्डड्रिंक के अलावा तरबूज, खीरा, ककड़ी, खरबूज खा रहे है लेकिन कुछ देर के बाद फिर गर्म हवा और उमस कस बल निकाल दे रही है। स्थिति यह है कि पंखा, कूलर या एसी किसी के भी नीचे बैठे हों, तो भी पसीना सूखने का नाम नही ले रहा।

गुरूवार को वाराणसी में धूपछांव के बाद भी मौसम के तेवर में कुछ खास बदलाव नही हुआ। अपरान्ह दो तक तक अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस,न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस रही। नमी 21 फीसद और हवा की रफ्तार 18 किमी प्रतिघंटा रही। वाराणसी में बीते शनिवार को शनिवार को तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस,सोमवार को अधिकतम तापमान जहां 43.8 डिग्री सेल्सियस, मंगलवार को 43.4 डिग्री,बुधवार को 44.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। दिन और रात में हो रही बिजली कटौती से भी लोग बेहाल हैं । आधी रात में कटौती से क्षुब्ध लोग उमस के बीच छत पर चहलकदमी कर समय गुजार रहे है।

मौसम के तेवर से लोगों को खासकर बच्चों और बुर्जुगों को पानी की कमी और पेट की बीमारियों के साथ डायरिया,हीट स्ट्रोक से भी जूझना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल धूप और गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। मानसून की सक्रियता भी कमजोर हो गई है। इसके एक सप्ताह की देरी से पहुंचने की संभावना है।

विशेषज्ञ लोगों को धूप में खास कर दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दे रहे है। निकलने पर सूती कपड़े पहनने के साथ सिर ढ़कने,शरीर में पानी की मात्रा कम न होने देंने,शरीर में अगर कोई दाने निकल रहे हैं, खुजली हो रही है तो चिकित्सक को दिखाने पर जोर दे रहे है।

जगतगंज वाराणसी के होमियोपैथी चिकित्सक डॉ सुधाकर सिंह बताते है कि कड़ी धूप में होमियोपैथी दवा भी कारगर है। गर्मी या तेज धूप में बाहर निकलते समय होम्योपैथिक दवा ग्लोनाइन की गोलियां ली जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में लू का अधिक खतरा रहता है। इसलिए यदि कोई लू से पीडि़त हो तो उसे फौरन ठंडी व हवादार जगह पर लिटा देना चाहिए और कपड़े ढीले कर देने चाहिए। शरीर का तापमान यदि बढ़ गया हो तो बर्फ मिले ठंडे पानी की पट्टी सिर पर और ठंडे तौलिए से पूरे शरीर को पोंछते रहें। जितना जल्द हो सके चिकित्सक को दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस तल्ख मौसम में ठंडई, नारियल का पानी, गन्ने का रस, नींबू का रस और आम का पन्ना काफी लाभदायक है। बाजारों में बिक रहे कोल्ड ड्रिंक से परहेज करना चाहिए।

—हीट स्ट्रोक (लू) के लक्षण

डॉ सुधाकर सिंह ने बताया कि लू के लक्षणों में शरीर का तापमान बढ़ जाना,तेज सिरदर्द होना,उल्टी होना,बुखार होना,पैर के तलवे में जलन होना,पसीना कम आना, कमजोरी लगना,हाथ-पैर कांपना,सांस लेने में तकलीफ,घबराहट होना आदि है।

श्रीधर

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