लखनऊ (हि.स.)। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने तमिलनाडु सरकार के लॉकडाउन व सीएए के विरुद्ध आन्दोलन में दर्ज मुकदमे वापस लेने के फैसले को सही ठहराया है। मायावती ने इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से भी ऐसे मुकदमे वापस लेने की मांग की है।
मायावती ने शनिवार को कहा कि तमिलनाडु सरकार ने लम्बे चले कोरोना लाॅकडाउन व नए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरुद्ध आन्दोलनों के दौरान दर्ज किए गए दस लाख मुकदमे वापस लेने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ के लिए ही सही किन्तु यह फैसला उचित है। इससे निर्दोषों को राहत मिलने के साथ-साथ कोर्ट पर भी भार काफी कम होगा।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार के लाखों लम्बित पड़े मामलों से लोग काफी दुःखी व परेशान हैं। अतः यूपी सरकार को भी इनके मुकदमों की वापसी के सम्बन्ध में सहानुभूतिपूर्वक विचार जरूर करना चाहिए ताकि लाखों परिवारों को राहत व कोर्ट-कचहरी से मुक्ति मिल सके, बसपा की यह मांग है।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान कोविड प्रोटोकॉल में छोटी गलती करने वालों के खिलाफ योगी सरकार मुकदमे वापस लेने का पहले ही फैसला कर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे दर्ज लगभग ढाई लाख मुकदमों को वापस लेने के निर्देश दे चुके हैं। प्रदेश भर के थानों में लॉकडाउन की धारा 188 के उल्लंघन को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए थे।
कोरोना संक्रमण काल में कई छात्र और मजदूर पैदल चलने को विवश हो गये थे। वह भी इन मुकदमों का शिकार हुए थे। मास्क न पहनने या स्तरीय मास्क न पहनने सहित अन्य कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए। शारीरिक दूरी का पालन न करने पर भी लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किये गये हैं। ऐसे मामलों को लेकर लोग पुलिस और कचहरी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सरकार के इस फैसले से लाखों लोगों व व्यापारियों को जल्द छुटकारा मिल जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि कोरोना के मुकदमों से आम जनता को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ेगी। थानों में दर्ज मुकदमें वापस लेकर उनको राहत प्रदान की जा रही है। इससे न्यायालय पर से मुकदमों का बोझ भी कम होगा।
