Tuesday, January 13, 2026
Homeविचारडॉक्टर एमपी सिंह : अभी करने को बहुत कुछ है

डॉक्टर एमपी सिंह : अभी करने को बहुत कुछ है

राज खन्ना

रिटायरमेंट के वर्षों बाद डॉक्टर एम.पी.सिंह फिर कालेज जाने लगे हैं। अब निःशुल्क पढ़ाते हैं। जीवन संगिनी के बिछुड़ने के बाद अपनी रचनात्मक कोशिशों को वह नया आकार देने में जुटे हैं। वैसे खामोशी से यह काम वह पहले से ही करते रहे हैं। 2013 में प्राथमिक कक्षाओं के पांच निर्धन मेधावी बच्चों को उन्होंने गोद लिया था। सभी बच्चों को सुल्तानपुर के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा छः में प्रवेश दिलाया। अगले सात वर्षों तक बढिया आवासीय व्यवस्था के साथ इन बच्चों की परवरिश-पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली। साधनों-सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता के बीच बच्चे पढ़ाई को लेकर लापरवाह न हो जाएं, इसका भी खूब ध्यान रखा। उनकी सेहत और हर छोटी-बड़ी समस्या की घर-परिवार जैसी फिक्र की। पांचों बच्चों हिमांशु पांडे, रोहित प्रजापति, शिवांशु उपाध्याय, सत्यवीर और शिवांशु मणि यादव ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति हासिल करके उस भरोसे को कायम रखा। 2020 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब ये छात्र अलग-अलग ठिकानों पर आगे की पढ़ाई कर रहे हैं।
5 अगस्त 2020 को जीवन संगिनी श्रीमती कलावती सिंह का असमय साथ छूट गया। उम्र के इस दौर में साथ छूटने की पीड़ा अकथनीय होती है। उस दौर से उबरना भी काफी मुश्किल होता है। अधिकतर टूटते-बिखरते या अपने में सिमटते है। पर कुछ का दूसरा रास्ता उन यादों को सजीव रखने की कोशिश से जुड़ा होता है। ऐसी कोशिशें दुःख के अंधेरे को चीरती हैं। उजाले की उम्मीदें कायम रखती हैं। नए सिरे से खुद को संजोने और कुछ बेहतर करने को प्रेरित भी करती हैं। एम.पी.सिंह के साथियों और चाहने वालों की एक बड़ी जमात है। उन सबको इस बात से सुकून मिलता है कि उन्होंने अपने इस हौसले को बरकरार रखा है। बीती शाम वह देर तक मेरे साथ थे। 1973 में जब वह सुल्तानपुर आये तब से यह जुड़ाव है। बीच में गुजर गया लगभग पांच दशक का लम्बा दौर। आत्मीय रिश्तों और निरतंर स्नेहिल संवादों की साझीदारी बीच उम्र का बड़ा हिस्सा कब फिसल गया, पता ही नही चला। साथ बैठे तो यादों की गठरी खुली। तमाम भूले-बिसरे प्रसंग फिर से ताजा हुए। आगे की योजनाओं की चर्चा हुई। उन्होंने कई कार्यक्रम तय किये है। इसी 18 मार्च को पहली कलावती स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्याल में आयोजित की जा रही है। 20 डिग्री कालेजों के चालीस छात्र ‘कोरोना से मुकाबले में अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत के प्रयास प्रशंसनीय रहे’ विषय के पक्ष-विपक्ष में विचार रखेंगे। दोनो वर्गों के प्रथम तीन प्रतियोगियों को नकद पुरुस्कार दिए जाएंगे।
डॉक्टर सिंह ने 1973 में राणा प्रताप कालेज में अध्यापन कार्य शुरू किया था। समाज शास्त्र उनका विषय है। 2009 में वह एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष पद से रिटायर हुए। एक समर्पित और सुयोग्य शिक्षक की उनकी ख्याति है। इस बीच अनेक शोध पत्रों का प्रकाशन और महत्वपूर्ण सेमिनारों में नियमित सक्रिय साझीदारी का सिलसिला चला। बीस शोधार्थियों ने उनके निर्देशन में पी.एच.डी. हासिल की। अब उस कॉलेज के चारों संकाय अर्थात कला, विज्ञान, शिक्षा शास्त्र और वाणिज्य की परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली छात्रा को प्रतिवर्ष वह कलावती स्मृति छात्रवृत्ति प्रदान करेंगे। इस छात्रवृत्ति के अधीन प्रत्येक संवर्ग की सर्वश्रेष्ठ छात्रा को दस हजार की धनराशि प्राप्त होगी। प्रति वर्ष एक उदीयमान रचनाकार को कलावती स्मृति पुरुस्कार देने का भी उन्होंने निश्चय किया है। अन्य सम्मान के साथ पच्चीस हजार की धनराशि इसमें शामिल होगी। राष्ट्रीय स्तर की कलावती स्मृति व्याख्यान माला की इसी वर्ष अक्टूबर से शुरुआत होगी। इस वर्ष के व्याख्यान का विषय पत्रकारिता से जुड़ा होगा। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को विकसित और प्रोत्साहित करने के लिए शीघ्र ही लेखन प्रतियोगिता के आयोजन का निश्चय है। विषय उसी समय दिया जाएगा। प्रथम तीन प्रतियोगियों को नकद राशि से पुरुस्कृत और सम्मान प्रदान किया जाएगा।
पिछले काफी दिनों से वह सुल्तानपुर को केंद्र सरकार की रामायण सर्किट योजना से जुड़वाने के लिए प्रयत्नशील है। जिला योजना के सदस्य के रूप में उन्होंने इसकी पहल की। जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रदेश के पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी से भी इस सिलसिले में वह कई बार भेंट कर चुके हैं। सांसद मेनका गांधी भी इसमें पर्याप्त रुचि दिखा रही हैं। सुल्तानपुर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वन गमन पथ पर स्थित है। यहां के विजेथुवा, धोपाप और सीताकुंड के पवित्र स्थानों का पौराणिक महत्व है। अयोध्या और श्रृंगवेरपुर के बीच स्थित सुल्तानपुर के रामायण सर्किट के अधीन आ जाने पर इन तीनों स्थलों के विकास के साथ ही तीर्थ और पर्यटन दृष्टि से भी जिले का महत्व बढ़ेगा। अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ डॉक्टर सिंह राजनीतिक क्षेत्र में भी खूब सक्रिय रहे हैं। इसकी शुरुआत 1974 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिलाध्यक्ष के तौर पर हुई। फिर भाजपा संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं। वह 1990-93 में पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे। लगातार दो सत्रों में 2002 से 2008 तक काशी प्रान्त के अध्यक्ष की जिम्मेदारी उन्हें दी गई। 2009 से 2014 तक वह पार्टी के शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश के प्रमुख रहे। अभी भी वह पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के साथ ही हिंदुस्तानी अकादमी के सदस्य हैं। उनके दोनो बेटे काफी प्रतिभाशाली हैं। बड़े बेटे सिद्धार्थ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कम्पनी इंटेंन के मालिक हैं। सिंगापुर उसका मुख्यालय है। न्यूयार्क, पुणे और चेन्नई में उसकी शाखाएं हैं। छोटे शांतनु जापान की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के भारत में प्रमुख हैं। डॉक्टर सिंह उनके पास जाते हैं। कुछ दिन ठहरते हैं। पर कर्मभूमि सुल्तानपुर फिर-फिर वापस बुला लेती है। थकने का सवाल नही। अभी यहाँ करने को बहुत कुछ है। … और फिर याद करने और साथ देने वाले भी तो खूब हैं !

डॉक्टर एमपी सिंह : अभी करने को बहुत कुछ है

हमारी अन्य खबरों को पढ़ने के लिए www.hindustandailynews.com पर क्लिक करें।

क्या आप श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के सदस्य बनना चाहते हैं?

मित्रों, सादर नमस्कार!
जैसा कि आप अवगत हैं कि इन दिनों देश के सबसे बड़े पत्रकार संगठन इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स से सम्बद्ध जिला इकाई गोण्डा श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पुनर्गठन की प्रक्रिया प्रचलित है। पत्रकारों के इस विशिष्ट समूह को मुख्यालय के लगभग सभी वरिष्ठ पत्रकारों का समर्थन व सहयोग प्राप्त है। संगठन की प्रदेश इकाई द्वारा जानकी शरण द्विवेदी (9452137310) के संयोजन में एक संयोजक मण्डल का गठन किया गया है, जिसमें उमा नाथ तिवारी (7398483009) व राज कुमार सिंह (8318482987) शामिल हैं। सदस्यता अभियान शुरू है। यूनियन के अनेक वरिष्ठ साथियों के पास संगठन का फार्म उपलब्ध है। जिन पत्रकार मित्रों को हमारे संगठन की सदस्यता लेनी है, वे सदस्यता फार्म को पूर्ण रूप से भरकर पासपोर्ट आकार की एक फोटो, आधार कार्ड व बैंक पासबुक की फोटो कापी के साथ 400 रुपए जमा करके सदस्य बन सकते हैं। होली से पूर्व नई कार्यसमिति के गठन का प्रयास है। शर्त यह है कि इच्छुक व्यक्ति किसी समाचार पत्र, चैनल अथवा पोर्टल से सक्रिय रूप से जुड़ा हो। हम आपको यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि भावी संगठन पत्रकारों के हक की लड़ाई लड़ने और उन्हें सम्मान दिलाने में सफल होगा। यहां यह बता देना समीचीन होगा कि हमारे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी मल्लिकार्जुनैया जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी जी तथा राष्ट्रीय महासचिव परमानंद पाण्डेय जी हैं। मल्लिकार्जुनैया जी का कन्नड़ पत्रकारिता में बड़ा नाम है। वह कनार्टक राज्य से हैं। हेमंत जी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं और सम्प्रति राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हैं। परमांनद जी देश की राजधानी दिल्ली के निवासी तथा उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं, जो हमेशा न्यायालय में पत्रकार हितों की लड़ाई लड़ते रहते हैं।

कलमकारों से ..

तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com पर प्रकाशन के इच्छुक कविता, कहानियां, महिला जगत, युवा कोना, सम सामयिक विषयों, राजनीति, धर्म-कर्म, साहित्य एवं संस्कृति, मनोरंजन, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक इत्यादि विषयों पर लेखन करने वाले महानुभाव अपनी मौलिक रचनाएं एक पासपोर्ट आकार के छाया चित्र के साथ मंगल फाण्ट में टाइप करके हमें प्रकाशनार्थ प्रेषित कर सकते हैं। हम उन्हें स्थान देने का पूरा प्रयास करेंगे :
जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
E-Mail : jsdwivedi68@gmail.com

RELATED ARTICLES

Most Popular