वाराणसी (हि.स.)। बच्चे अचानक अपनी मां का दूध पीना छोड़ देते है तो डिब्बे का दूध विकल्प नहीं बन सकता। डिब्बे का दूध पिलाने से बच्चों को डायरिया भी हो सकती है और वे कुपोषण का शिकार भी बन सकते हैं। मां का दूध ही बच्चे का सर्वोत्तम आहार होता है। स्तनपान से सिर्फ शिशु की ही नहीं बल्कि मां की भी सेहत अच्छी रहती है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ डा. राहुल सिंह बताते हैं कि अधिकतर उन धात्री माताओं के सामने समस्या होती हैं जो स्तन में दूध की कमी अथवा किसी अन्य चिकित्सीय समस्या के कारण बच्चे को सामान्य रूप से स्तनपान नहीं करवा पाती हैं । मजबूरी में वह डिब्बाबंद दूध बोतल से पिलाना शुरू कर देती हैं। जो बच्चे के लिए बेहद नुकासनदेह होता है।
डा. राहुल ने बताया कि. छह माह तक शिशुओं को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। यदि शिशु स्तनपान नहीं कर रहा है तो उसे डिब्बे का दूध पिलाने की बजाय फौरन चिकित्सक से सम्पर्क कर एसएसटी अपनानी चाहिए । जिससे शिशु पुनः स्तनपान करने लगे।
शुद्धीपुर की रहने वाली रेखा के बच्चे ने जन्म के तीसरे माह में मां का दूध पीना अचानक छोड़ दिया तो उन्होंने उसे डिब्बे का दूध पिलाना शुरू कर दिया । पखवारा भर भी नहीं बीता था कि बच्चे को डायरिया हो गया। कई जगह उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। बच्चा धीरे.धीरे कमजोर होकर कुपोषण का शिकार हो गया। हालत बिगड़ने पर उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के साथ.साथ ;एसएसटी का भी प्रयोग किया गया। नतीजा हुआ कि चार.पांच दिनों के प्रयास में ही बच्चे ने मां का दूध पीना शुरू कर दिया।
-क्या है एसएसटी
पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय एमसीएच विंग परिसर में स्थित एनआरसी की आहार परामर्शदाता ;डायटीशियन विदिशा शर्मा बताती हैं कि एसएसटी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बच्चे को कृत्रिम तरीके से स्तनपान कराया जाता है। इसमें एक ऐसी पतली नली का प्रयोग किया जाता है। जिसके दोनों सिरे खुले होते हैं। पहले सिरे को मां के दूध से भरी कटोरी अथवा किसी अन्य बर्तन में लगाया जाता है जबकि दूसरे सिरे को मां के स्तन पर । दूध की इस कटोरी को मां के कंधे के पास रखा जाता है। इसके बाद स्तनपान कराते समय जब दूध नली से टपकता हुआ बच्चे के मुंह में जाता है तब बच्चे को लगता है कि दूध मां के स्तन से ही आ रहा है और बच्चा दूध पीना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया को लगातार कुछ दिनों तक अपनाने का बड़ा लाभ यह होता है कि जो बच्चा स्तनपान छोड़ चुका होता है । वह दोबारा स्तनपान करना शुरू कर देता है। इतना ही नहीं किन्हीं कारणों से मां का दूध पूरी तरह नहीं आ रहा हो तो इस प्रक्रिया को अपनाने से मां को पुनः पर्याप्त दूध आने लगता है।
-मां का दूध बच्चे का सर्वोत्तम आहार
अस्पताल के एमसीएच विंग की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. आरती दिव्या कहती हैं कि मां का दूध ही बच्चे का सर्वोत्तम आहार होता है। स्तनपान से सिर्फ शिशु की ही नहीं बल्कि मां की भी सेहत अच्छी रहती है। प्रसव के एक घंटे के अंदर शिशु को मां का दूध अवश्य पिलाना चाहिए। यह उसके लिए अमृत के समान होता है । इतना ही नहीं पहले तीन दिन तक निकलने वाला मां का गाढ़ा पीला दूध शिशु के लिए अत्यधिक फायदेमंद होता है। उसमें कई पौष्टिक तत्व होते हैं। जो शिशु को संक्रमण से बचाने के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं। शुरू के छह माह सिर्फ स्तनपान ही कराना चाहिए।
श्रीधर
