प्रयागराज (हि.स.)। तनाव या स्ट्रेस से हर व्यक्ति जूझ रहा है। यह हमारे मन से संबंधित रोग है। इसका कारण हमारी मनः स्थिति एवं बाहरी परिस्थिति के बीच सामंजस्य न बनने के कारण उत्पन्न तनाव है। इसी तनाव के कारण ही व्यक्ति को डिप्रेशन होता है। इसे दूर करने में स्पर्श शक्ति उपचार रामबाण की तरह कार्य करती है और व्यक्ति को सकारात्मक बनाती है।
यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान मधुवन विहार स्थित प्रयागराज रेकी सेंटर पर स्पर्श चिकित्सा के प्रख्यात ज्ञाता सतीश राय ने हिन्दुस्थान समाचार से भेंट के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों को उतना महत्व नहीं दिया जाता, जितना किसी शारीरिक रोग को जबकि डिप्रेशन एक मानसिक अवस्था है और इसे गम्भीरता से लिया जाना चाहिए।
बताया कि भारत में करीब 20 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। यहां तक कि ग्लैमर और चकाचौंध से गुलजार फिल्मी दुनिया मे डिप्रेशन से सम्बंधित खबरें टीवी एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। कई बड़ी हस्तियां एवं सितारे डिप्रेशन का दर्द झेल चुके हैं। उन्होंने कारण पूछे जाने पर कहा कि डिप्रेशन की मुख्य वजह है अप्रसन्नता, तिरस्कार, अपमान, ब्रेकअप, लाचारी, निराशा, प्रेम में असफल होना, घटते स्टारडम और कुछ घरेलू बाहरी कारण, भय जैसी भावना जब काफी दिनों तक बनी रहती है तो वह डिप्रेशन से ग्रसित हो जाता है। इसे मनोरोग भी कहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके 90 प्रतिशत रोगियों में नींद की समस्या हो जाती है।
सतीश राय ने बताया कि इसके उपचार में यह देखें कि उसे कौन सा डिप्रेशन है यूनीपोलर या बाइपोलर। यूनीपोलर (एक ध्रुवीय अवसाद) इसमें रोगी लगातार उदास रहता है, उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता, मन हमेशा चिड़चिड़ा रहता है, परेशान रहना, भूख कम लगना, जीने की इच्छा न करना, मन में आत्महत्या का विचार आना, नींद में परिवर्तन, निराशावादी होना इसके लक्षण हैं।
वाईपोलर (द्विध्रुवी विकार) में व्यक्ति बहुत ज्यादा अवसाद से घिर जाता है। अत्यधिक उन्मादी हो जाता है, इसमें माइंड लगातार बदलता रहता है। इस बीमारी में अत्यधिक प्यास लगना, वजन बढ़ना, हाथों में हल्का कम्पन होना, लगातार चलने की आदत, आसानी से चिढ़ना और विचलित हो जाना, अत्यंत उत्साही होना, ज्यादा तेज आवाज में जल्दी-जल्दी बातें करना, रात भर जागना आदि। बाइपोलर डिसऑर्डर में लोग दो तरह से बीमार होते हैं पहला उदासी और दूसरा खुश होना।
स्पर्श चिकित्सक ने कहा कि यह एक मानसिक समस्या है परंतु यह मरीज को शारीरिक रूप से भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग अपने शरीर का ध्यान रखते हैं , उसी तरह क्या कोई मन की स्टेमिना बनाए रखने के लिए कोई व्यायाम करता है। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन की कोई दवा है ही नहीं, इसका इलाज भूतकाल एवं भविष्य काल में न रहकर वर्तमान में जीना है। नकारात्मक सोच को सकारात्मक में बदलने के सभी उपाय करिए। इसके उपचार में स्पर्श शक्ति ध्यान, प्राणायाम बहुत सहायक सिद्ध हुआ है।
विद्या कान्त
