जिले के मुजेहना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक नवजात की मौत का मामला
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक सरकारी चिकित्सालय में नवजात की मौत के मामले में उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम ने दुबारा जांच शुरू कर दी है। इससे पूर्व उन्होंने प्रकरण में जिले के पत्रकारों द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों के आधार पर दो सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए तीन सदस्यीय नई टीम से प्रकरण का विस्तृत जांच कराने का निर्देश जिलाधिकारी को दिया था।

जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुजेहना पर बीती 27 अगस्त की रात एक महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। उसी रात करीब डेढ़ बजे उसने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु की सांसे लगभग न चलने के कारण ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने उसकी सांसे वापस लाने की कोशिश के क्रम में उसे वार्मर पर रख दिया तथा परिजनों को उस वार्ड से बाहर कर दिया। इस बीच रात में ही बच्चे के चेहरे को किसी जंगली जीव ने कुतर दिया। इस पर परिजनों ने हंगामा करते हुए धानेपुर थाने में अज्ञात के विरुद्ध नवजात की गैर इरादतन हत्या का अभियोग दर्ज करवा दिया। मीडिया में यह खबर आते ही शासन स्तर तक हड़कंप मच गया। शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार और मुख्य चिकित्साधिकारी डा रश्मि वर्मा की दो सदस्यीय जांच टीम बनाकर उसी दिन मौके पर भेजा। जांच टीम ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को दोषमुक्त करते हुए एक स्थानीय पत्रकार पर सरकार तथा विभाग की छवि धूमिल करने का आरोप मढ़ दिया। आरोपी चिकित्सक ने जांच टीम को बताया कि बच्चे को रात में ही परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। वे रात में उसे लेकर घर भी चले गए थे। उनके घर पर बच्चे को किसी जानवर ने कुतरा। बाद में एक स्थानीय पत्रकार के उकसावे पर परिजन दुबारा मृत बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात एएनएम समेत 65 स्वाथ्य कर्मचारियों की तहरीर पर पत्रकार उमानाथ तिवारी के खिलाफ दलित उत्पीड़न, सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारियों को डरा धमकाकर अवैध वसूली करने, उनके साथ छेड़छाड़ करने, प्रसव कक्ष में निर्वस्त्र महिलाओं के फोटो खींचने समेत कई संगीन धाराओं में अभियोग दर्ज करवा दिया गया। चिकित्सक ने जांच टीम से यह भी कहा कि नवजात सात माह का (प्री मैच्योर) था। इसलिए वह मृत ही पैदा हुआ था। जबकि गर्भवती महिला के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तथा गर्भवती महिला के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किए गए कार्ड के अनुसार जन्म के समय नवजात 38 सप्ताह का था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, नवजात की मौत श्वासावरोध के कारण हुई है।
पिछले दिनों गोंडा दौरे पर पहुंचे उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के समक्ष जिले के पत्रकारों ने सभी साक्ष्यों को बिंदुवार रखते हुए प्रकरण की किसी अन्य समिति से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। साक्ष्यों के प्रकाश में उन्होंने डीएम को बुलाकर कहा था कि पूर्व में भेजी गई जांच रिपोर्ट को मैं निरस्त करता हूं तथा इस बार स्वास्थ्य विभाग के मुखिया (सीएमओ) को टीम से अलग करके सीडीओ की अगुवाई में एक मजिस्ट्रेट तथा एक पुलिस अधिकारी को शामिल करते हुए नए सिरे से जांच कराई जाय। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। टीम ने शनिवार को पूर्वान्ह अस्पताल पहुंचकर करीब एक घण्टे तक चिकित्सा अधीक्षक डा. सुमन मिश्रा तथा अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस में दर्ज दोनों मामलों की प्राथमिकी समेत विवेचक द्वारा अब तक की गई छानबीन के बारे में जानकारी एकत्रित की गई। बाद में टीम ने पीड़ित परिवार के गांव रुद्रगढ़ नौसी जाकर परिजनों से भी पूछताछ की।जांच टीम के सदस्य अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि सभी सम्बद्ध पक्षों का बयान दर्ज कर लिया गया है। जांच रिपोर्ट जल्द ही जिलाधिकारी को सौंप दी जायेगी।

