Sunday, April 12, 2026
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ठाकुर बांकेबिहारी जी ने भक्तों संग खेली रंगीली होली, रंग डलवाने को उमड़ा सैलाब

वृंदावन बांकेबिहारी मंदिर : भक्ति और प्रेम का ऐसा बरसा रंग, देखते रह गए सब

वृंदावन के सात देवालयों पर रंगभरनी एकादशी से बरसने लगा है रंग गुलाल

गाल गुलाबिन पै, मल लाल गुलाल लगावत लाला

बहुत दिनन सों तुम मनमोहन, फागहि फाग पुकारे।

आज देखियों सैल फाग की, पिचकारिन के फुहारे।।

मथुरा (हि.स.)। वृंदावन में सोमवार रंगभरनी एकादशी पर ठाकुर बांके बिहारी मंदिर सहित ब्रज के सभी मंदिरों में पूरे यौवन के साथ होली की शुरुआत हुई। यहां रंगभरनी एकादशी के दिन जमकर रंग और गुलाल उड़ाया गया। भक्ति और प्रेम का ऐसा रंग बरसा, कि सब देखते रह गए।

ठाकुरजी सफेद पोशाक पहन स्वर्ण पिचकारी से भक्तों पर रंग की ऐसी बौछार की पूरा मंदिर जयकारों से गुंजेमान हो गया। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गोस्वामी मंदिर में गोपी के गाल गुलाबिन पै, मल लाल गुलाल लगावत लाला और बहुत दिनन सों तुम मनमोहन, फागहि फाग पुकारे। आज देखियों सैल फाग की, पिचकारिन के फुहारे आदि होली के गीतों को गाकर ठाकुरजी को रिझाया।

सोमवार सायंकाल चार बजे के बाद ठाकुर बांकेबिहारी लाल द्वारा केसर कीच, चोबा, चंदन, इत्र, गुलाल से होली खेली गयी तो पुजारियों ने आने वाले श्रद्धालुओं पर बड़ी-बड़ी पिचकारियों के जरिये टेसू के फूलों से चहकते पीले रंग भक्तों के ऊपर डाले। रंग-गुलाल खूब उड़ा। भक्त बिहारीजी मंदिर प्रांगण में अपने ऊपर रंग डलवाकर निहाल हो रहे थे। वृन्दावन के सभी सातों देवालयों में रंगभरनी एकादशी पर आज से रंग-गुलाल बरसने लगा है।

सोमवार की सुबह तय समय से लगभग आधे घंटे पूर्व पट खुलते ही बांकेबिहारी मंदिर के बाहर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा जन समुद्र मंदिर परिसर में जयकारे लगाते हुए प्रवेश कर गया। रंगभरनी एकादशी पर मंदिर के सेवायतों ने सबसे पहले रजत सिंहासन पर श्वेत पोशाक धारण कर विराजमान ठाकुर बांकेबिहारीजी पर स्वर्ण पिचकारी से केसर निर्मित रंग डालकर वृंदावन में परंपरागत होली का शुभारंभ किया।

रंगीली होली पर ठाकुरजी ने जब भक्तों संग होली खेली तो लगा कि संपूर्ण ब्रह्मांड इस दिव्य दर्शन के लिए ठहर गया। प्रेमावेश से लवरेज जनसमुद्र मंदिर परिसर में हिलोरे मार रहा था। रंग और गुलाल के उड़ते गुबार, फूलों से हुई होली के रंग में मंदिर परिसर सराबोर हो गया। हजारों भक्त अपने आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी को नयनों में भरने की अभिलाषा लिए मंदिर में पहुंचे और दर्शन पाकर कृतार्थ हुए।

धूलैड़ी पर बांकेबिहारी नहीं डालते भक्तों पर रंग, राजा बनकर देखते है श्रद्धालुओं की होली

होली रंगभरनी एकादशी से शुरु होकर पूर्णिमा की शाम तक होगी

मंदिर के सेवायत ने बताया रंगभरनी एकादशी पर ठाकुर बांके बिहारी जी के लिए शुद्ध केसर का रंग बनाया गया। सेवायतों सबसे पहले स्वर्ण रजत निर्मित पिचकारी से ठाकुरजी के ऊपर रंग डाला। इसी के साथ वृंदावन में होली का परंपरागत शुभारंभ गया। उन्होंने बताया कि टेसू के रंगों के साथ साथ चोवा, चंदन के अलावा अबीर गुलाल से मंदिर में होली खेली जाती है। उन्होंने बताया कि यह होली रंगभरनी एकादशी से शुरु होकर पूर्णिमा की शाम तक होगी। धूलैड़ी वाले दिन ठाकुरजी भक्तों पर रंग नहीं डालते बल्कि स्वर्ण सिंहासन पर गुलाबी पोशाक पहनकर राजा बनकर बैठते हैं और अपने भक्तों को होली खेलते देखते हैं। इसी दिन सुबह मंदिर के सेवायतों के द्वारा क्षेत्र में चौपाई(भ्रमण) निकाली जाती है। समाज गायन के साथ बाधाई गीत होते हैं। एकादशी के चलते वृन्दावन में श्रद्धालुओं की काफी संख्या में उपस्थिति थी। पुलिस-प्रशासन द्वारा बाहरी क्षेत्रों में ही पार्किंग पर वाहनों को खड़ा कर दिया गया था। सभी स्थानों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। वृन्दावन नगर के अंदर चौपहिया वाहनों का आज प्रवेश बंद कर दिया गया था। जगह-जगह पुलिस की चैकिंग चल रही थी।

महेश

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