फर्रुखाबाद (हि.स.)। जिले में पढ़ रही भीषण सर्दी की वजह से आलू किसानों के अरमान भी ठंडी हो गये हैं। मौजूदा समय में 700 रुपये प्रति पैकेट बिकने वाले आलू के भाव 200 रुपये प्रति पैकेट गिरकर 500 रुपये प्रति पहुंच गए हैं। जिससे आलू किसानों को भारी घाटा हो रहा है।
फर्रुखाबाद जिले में आलू की अगेती फसल तकरीबन 2000 हेक्टेयर भूमि पर तैयार की गई थी। शुरुआती दौर में आलू 11 रुपये पैकेट से लेकर हजार रुपया पैकेट तक बिका। लेकिन पिछले तीन दिनों से यहां पड़ रहे घने कोहरे की वजह से आलू के दाम एकाएक धड़ाम हो गए।
गौरतलब है कि फर्रुखाबाद जिले का प्रमुख उद्योग आलू ही माना जा रहा है। कहने को तो यह आलू जमीन के अंदर पैदा होता है, लेकिन इसकी पैदावार से किसान आसमान के सपने देखता है। बेटे, बेटियों की शिक्षा, दीक्षा, विवाह और तमाम कार्य इस आलू से ही जुड़े हुए हैं। मौजूदा समय में आलू किसान भाव गिरने से परेशान हो रहा है।
प्रगतिशील किसान नारद सिंह कश्यप का कहना है कि आलू के भाव गिरने से किसान हताश हो गया है। ठंड ने किसानों के अरमान भी ठंडे कर दिए हैं। आलू के भाव एकाएक गिरने से किसान अपने बेटे बेटियों की शादी नहीं कर पा रहा है।
दूसरी तरफ आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू वर्मा का कहना है कि मंडी में आलू की आमद बढ़ रही है, लेकिन भाव अच्छे नहीं मिल रहे हैं। जिसकी खास वजह है कि व्यापारी सर्दी की वजह से कम आ रहा है।
शीत ग्रह एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गंगवार उर्फ सन्नू भैया का कहना है कि शीतगृहों से आलू लगभग पूरी तरह से निकाला जा चुका है। पुराने आलू के भाव और नए आलू के भाव इस समय एक ही समान चल रहे हैं। हालांकि अभी नया आलू शीत गृह में भंडारित करने योग्य नहीं है, लेकिन इसकी बिक्री तत्काल प्रभाव से ना होने पर आलू का रंग काला पड़ जाता है। जिससे बाहर की मंडियों में भी आलू के दाम उचित नहीं मिल पाते। फिलहाल भाव, मौत, बरसा के संबंध में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। लेकिन अभी आलू के जो भाव धड़ाम हुए हैं उनसे आलू किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि लेट वैरायटी का आलू भी बाजारों में आने लगा है। किसानों को चाहिए कि वह अपना नया आलू खोदकर उसमें गेहूं तथा अन्य फसलें तैयार करें, जिससे उनका घाटा पूरा किया जा सके।
चंद्रपाल सेंगर
