प्रयागराज (हि.स.)। “फोटोनिक्स के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति“ (डब्ल्यूआरएपी) पर आधारित छठी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला गुरुवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद (ट्रिपल आईटी) में शुरू हुई। कार्यशाला का उद्घाटन 8 दिसम्बर को होगा। गुरुवार को आए वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
प्रथम सत्र में डॉ. अमित के. अग्रवाल, आईआरडीई, डीआरडीओ ने “माइक्रो ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी और उसके अनुप्रयोग“ विषय पर कहा कि हाल के दशक में प्लास्मोनिक कोशिकाओं ने सबसे अच्छे स्रोत के रूप में ध्यान आकर्षित किया है जो अत्यधिक रोमांचक सतह प्लास्मोंस द्वारा फैलने और बिखरने के माध्यम से प्रकाश को अवशोषित करता है। उन्होंने माइक्रो-ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में बात की, जिसमें लिथोग्राफी की प्रमुख भूमिका पर ध्यान देने के साथ मेडिकल इमेजिंग, दूरसंचार और अन्य क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर जोर दिया गया।
उन्होंने बताया कि आईआईटी भुवनेश्वर के डॉ. राजन झा ने प्लास्मोनिक्स के बुनियादी सिद्धांतों की खोज की। स्वास्थ्य देखभाल और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में इसके अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला और क्वांटम डॉट्स के माध्यम से क्वांटम सेंसिंग और संचार प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में सतह प्लास्मोंस (इसके बुनियादी सिद्धांतों सहित) की भूमिका का प्रदर्शन किया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. आर विजया, आईआईटी कानपुर और डॉ. उपेन्द्र कुमार आईआईआईटी ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम प्रमुख डॉ. अखिलेश तिवारी ने कहा कि यह कार्यशाला शिक्षा जगत और उद्योग के बीच आदान-प्रदान के लिए एक मंच के रूप में फोटोनिक्स में हालिया प्रगति के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और अनुसंधान परिणामों की प्रस्तुति के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन 8 दिसम्बर को सुबह 9 बजे झलवा परिसर में होगा। कार्यशाला के दूसरे प्रमुख प्रोफेसर रजत सिंह ने बताया कि कार्यशाला में सौ प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कुल 130 पेपर देश और विदेश से स्वीकार किये गये हैं।
विद्या कान्त/सियाराम
