Monday, April 13, 2026
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 टेराकोटा कलाकार बोले-हर संकट के बाद इस हुनर ने हमें खड़ा कर दिया

-‘योगी आदित्यनाथ का एक जिला-एक उत्पाद मील का पत्थर साबित हुआ

गोरखपुर (हि.स.)। गोरखपुर के औरंगाबाद के टेराकोटा कलाकारों को हर बार उनके माटी ने ही उबारा है। वे खुद कहते हैं कि कई दौर ऐसे रहे जब हम टूट चुके थे, लेकिन अपनी माटी के प्रेम की वजह से हम आज भी खड़े होते रहे। यूं कहें तो हम हर बार टूटे और हर बार तन कर खड़े हो गए।

कलाकार लक्ष्मी प्रजापति कहते हैं हम हम जैसे टेराकोटा कलाकारों के लिए भी वैश्विक महामारी कोरोना का काल बहुत पीड़दायक रहा, लेकिन ”हम अपनी माटी से जुड़े रहे। इसलिए हमें कोरोना भी नहीं हरा पाया।” अपनी मिट्टी और उसे गढ़ने का हुनर ही काम आया। संक्रमण रोकने के लिए हुए लॉकडाउन के कारण सब कुछ अचानक ठहर सा गया था। आपूर्ति की पूरी चेन गड़बड़ हो गई थी। अचानक सूझा कि हम मिट्टी से काम करते हैं। टेरोकोटा के उत्पाद तैयार करते हैं। उसे सड़ना है न ही उसकी कोई एक्सपायरी डेट है। काम करो। उत्पादों को इकट्ठा करो। दिन तो बहुरेंगे ही। बेहतर दिनों की उम्मीद में हमने अपना काम जारी रखा। कोरोना के बाद इतने आर्डर आये कि जितने भी उत्पाद तैयार थे, सब बिक गये।

लक्ष्मी प्रजापति यह कहते नहीं अघाते कि इसके पीछे हमारे महाराज जी (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) ही थे। टेराकोटा को गोरखपुर का ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) घोषित किया था। लगातार इसकी ब्रांडिंग भी करवाई। इस नाते काम की स्थिति भी ठीक थी। हमारे पास काम लायक पूंजी थी और संसाधन भी। हमारा काम चल गया। नहीं तो हममें से कई बर्बाद हो गये होते।

गोरखपुर के उत्तरी छोर पर स्थित गुलरिहा गांव के 40 वर्षीय राजन प्रजापति कहते हैं कि वे मिट्टी में जान डालने के हुनर में माहिर हैं। उनको राष्ट्रपति और उत्तर प्रदेश सरकार से पुरस्कार मिल चुका है। टेराकोटा निर्माण ही इनका पुश्तैनी पेशा है। कुछ लोगों ने अलग-अलग साइज के हाथी-घोड़े बनाना शुरू किया। इस हुनर को टेराकोटा नाम मिला। धीरे-धीरे औरंगाबाद इस काम के लिए मशहूर हो गया। तारीफ मिलने पर यहां के लोगों ने खुद के उत्पादों के लिए बाजार की मांग की। अब दूर-दूर से आर्डर आते हैं। यह काम आसपास के कुछ अन्य गांवों में भी होने लगा। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर कलाकारों को ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) घोषित किया गया। वर्तमान में औरंगाबाद के साथ ही गुलरिहा, भरवलिया, जंगल एकला नंबर-2, अशरफपुर, हाफिज नगर, पादरी बाजार, बेलवा, बालापार, शाहपुर, सरैया बाजार, झुंगिया, झंगहा क्षेत्र के अराजी राजधानी आदि गांवों में टेराकोटा शिल्प रोजगार का बड़ा जरिया बना हुआ है।

आमोद

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