– जनवरी 2022 से अब तक 1079 टीबी ग्रसित वयस्क लिए गए गोद
– टीबी मरीजों को पोषक आहार के साथ ही मिल रहा भावनात्मक सहयोग
औरैया (हि.स.)। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सामाजिक संस्थाएं, विभिन्न संगठन और व्यक्तिगत तौर पर लोग टीबी ग्रसित मरीजों की मदद को आगे आकर स्वास्थ्य विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को तैयार हैं। इसके तहत पिछले साल सितंबर में ‘निक्षय मित्र’ की मुहिम शुरू हुई थी, जिसका जनपद में सकारात्मक परिणाम दिख रहा है। जनपद में वर्तमान में 72 निक्षय मित्र क्षय रोगियों के उपचार और पोषण में सहयोग कर रहे हैं। इन निक्षय मित्रों ने जनवरी 2022 से अब तक करीब 1079 वयस्क टीबी मरीजों को गोद लिया है।
क्षय ग्रसित बच्चों को गोद लेने की पहल जनपद ज्यांट्स ग्रुप ऑफ औरैया ने वर्ष 2015 में की थी। इस ग्रुप ने हमेशा से ही 20 बच्चों को गोद लिया और इन सभी के स्वस्थ हो जाने पर 20 अन्य बच्चे गोद ले लिये। तब से यही प्रक्रिया इस ग्रुप के द्वारा की जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव व जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ संत कुमार सहित विभाग के कई जिलास्तरीय अधिकारियों व स्वास्थ्य कर्मी भी क्षय रोगियों को गोद लेकर उनकी मदद कर रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि टीबी रोगियों के लिए दवा के साथ-साथ प्रोटीनयुक्त पोषक आहार का सेवन बहुत ही जरूरी होता है। धन के अभाव में बहुत से टीबी रोगी पोषक खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इस कार्य में निक्षय मित्र भरपूर सहयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिए सभी के साझा प्रयास की बड़ी जरूरत है।
क्षय रोगियों को गोद लेकर पुष्टाहार के साथ भावनात्मक व सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा यह मुहिम शुरू की गई थी। इसमें सामाजिक संगठन, संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों व आम लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया गया। इसका नतीजा रहा कि गेल इंडिया लिमिटेड ने टीबी से ग्रसित 230 क्षय रोगियों को गोद लेकर उनको स्वस्थ बनाने की ज़िम्मेदारी ली थी।
गेल इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधि नवीन कुमार बताते हैं कि जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से प्रेरित होकर निक्षय मित्र बने और टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेने का निर्णय लिया। शुरुआत में ज्यादा कुछ पता नहीं था तो स्वास्थ्य कर्मियों से सलाह ली, जिसमें उन्होने पूरा सहयोग किया। हर माह टीबी मरीजों को पोषण पोटली प्रदान कर रहे हैं, जिसमें भुना चना, गुड़, मूंगफली, गुड़-मूँगफली की चिक्की, सत्तू और अन्य पोषक सामग्री शामिल हैं। पोषण पोटली का उपयोग सिर्फ क्षय रोगी ही कर रहा है, इसके लिए भी वह फॉलो-अप करते हैं। नवीन बताते हैं कि डॉट सेंटर की दवा से तीन बच्चे ठीक महसूस कर रहे हैं लेकिन उन्हें पूरे छह माह तक दवा खाने के लिए कहा गया है।
ज्यांट्स ग्रुप ऑफ औरैया के प्रतिनिधि रोहित अग्रवाल ने बताया कि वह संस्था के माध्यम से व्यक्तिगत खर्चे से सभी रोगियों को हर माह पोषण पोटली दे रहे हैं। इसके साथ ही एक भी दिन दवा न छूटे इसके लिए वह मरीजों को प्रेरित करते रहते हैं। खानपान ठीक हो रहा है या नहीं, इसके बारे में वह परिजनों से नियमित बात करते हैं और उनकी ओर से दिये जा रहे परामर्श का पालन भी करते हैं।
क्षय रोगी 14 वर्षीय अतिथि (बदला हुआ नाम) बताती है कि चार महीने पहले उसे खांसी और बुखार था। जांच में डाक्टर ने टीबी रोग होने की बात बताई। अस्पताल से दवा मिली। उसके पिता मजदूरी करते हैं। कभी काम भी नहीं मिल पाता। इसलिए पोषणयुक्त भोजन नहीं कर पाते थे। गेल द्वारा उन्हें पोषण किट सहित खाद्य सामग्री दी जा रही है। इससे उन्हें बहुत मदद मिली है।
टीबी मरीजों को मिल रही सुविधा
उप जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ एपी सिंह ने बताया की निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज जारी रहने तक टीबी मरीजों के बैंक खाते में 500 रुपये प्रतिमाह भेज रहा है। अस्पताल से डॉट थैरेपी, इलाज व एक्स-रे की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में संपर्क करके टीबी मरीजों को गोद लिया जा सकता है। अधिकारी ने अपील की है कि इसमें और भी लोग इस मुहिम में आगे आये। जिला पीपीएम समन्वयक रविभान सिंह ने बताया कि जिले में करीब 512 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक 405 मरीजों को गोद लिया गया है।
सुनील
