-अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई जारी
प्रयागराज (हि.स.)। वाराणसी ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी है। अगली सुनवाई तीन नवम्बर को होगी। कोर्ट के आदेश पर अधीनस्थ अदालत की पत्रावली की छाया प्रति दाखिल की गई।
याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी ने बहस की। जिला जज के फैसले को पढ़कर सुनाया। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति जे जे मुनीर कर रहे हैं। हिंदू महिलाओं द्वारा दाखिल सिविल वाद की ग्राह्यता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त करने के जिला जज के आदेश को चुनौती दी गई है।
अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी की याचिका पर जिला जज ने रिकॉर्ड प्रस्तुत किया था। प्रस्तुत रिकॉर्ड पूर्ण नहीं था, इस कारण कोर्ट ने पूरा रिकॉर्ड सत्यापित प्रति के साथ जिला जज वाराणसी को 21 अक्टूबर को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। आज रिकॉर्ड की छाया प्रति पेश किया गया।
वाराणसी के जिला जज ने 12 सितम्बर के आदेश से हिंदू पक्ष की महिलाओं द्वारा श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी थी। आपत्ति खारिज कर मुकदमे की सुनवाई करने का आदेश दिया है। जिसे चुनौती दी गई है।
मालूम हो कि दिल्ली की राखी सिंह व कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना किए जाने की मांग की है। मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन ए इंतजामियां कमेटी ने हिंदू महिलाओं के बाद पर आपत्ति दर्ज की तथा कहा था कि यह वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत सुनवाई लायक नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से उठाई गई आपत्ति की अर्जी खारिज खारिज कर दी थी।
दिल्ली की राखी सिंह समेत 5 महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में पिछले साल वाद दाखिल कर श्रृंगार गौरी की पूजा अर्चना किए जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में चल रही है।
मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर महीनों चली सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने अगस्त महीने में अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया था। जिला जज एके विश्वेश की कोर्ट ने 12 सितम्बर को अपना फैसला सुनाया था। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए राखी सिंह केस को चलते रहने की इजाजत दी थी।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम ने एक बार फिर दोहराया गया है कि 1991 के प्लेसेज आफ वर्शिप एक्ट के तहत इस मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है। अर्जी में हाईकोर्ट का फैसला आने तक वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पांच मामले पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग है। हालांकि राखी सिंह का केस पहली बार हाईकोर्ट आया है।
आर.एन
