नेशनल डेस्क
नई दिल्ली/लखनऊ। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने दावा किया है कि वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान एक कमरे में शिवलिंग प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि सर्वे के दौरान दोनों पक्षों की वकीलों की उपस्थिति में शिवलिंग मिला। इसलिए वह स्थान जहां शिवलिंग है, वह मंदिर है, अब भी है और 1947 में भी था। यह स्वयं सिद्ध हो चुका है। मैं आशा करता हूं कि इस तरह के साक्ष्य मिलने पर अब समस्त देशवासी स्वीकार करेंगे, इसका आदर करेंगे और इसकी जो स्वाभाविक परिणतियां हैं, उस तरफ भी देश बढ़ेगा। मामला न्यायालय के विचाराधीन है, न्यायालय ने उस हिस्से को संरक्षित (सील) किया है। पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की है कि वहां कोई छेड़छाड़ न हो। उन्होंने कहा, ’हम आशा करेंगे की यह विषय परिणाम तक पहुंचे। मामला क्योंकि अभी न्यायालय में है। इस पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। न्यायालय का निर्णय आने के बाद हम इसके बारे में आगे विचार करेंगे और तब विश्व हिंदू परिषद तय कर पायेगी कि आगामी कदम कौन से होंगे।’ इस बीच केशव प्रसाद मौर्य ने भी ट्वीट कर सत्य सामने आने की बात कही है। यूपी के उप-मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ’सत्य को आप कितना भी छिपा लीजिये लेकिन एक दिन सामने आ ही जाता है क्योंकि सत्य ही शिव है। बाबा की जय, हर हर महादेव।’
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उधर, भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने भी ज्ञानवापी सर्वे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कल कोर्ट कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट देनी है। यदि प्रत्यक्षदर्शियों ने वहां शिवलिंग देखा है तो ये आगे कोर्ट की प्रक्रिया में सामने आएगा। उन्होंने कहा कि इतिहासकार सीताराम गोयल ने ऐसे 30 हजार धर्मस्थलों की शिनाख्त की थी जो हिन्दू मंदिरों को तोड़कर बनाए गए थे। तब विश्वहिन्दू परिषद ने कहा था कि हमें तीन मंदिर दे दें। शेष की बात हम छोड़ देंगे। इस बीच वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने सर्वे की कार्यवाही पूरी होने के बाद किए जा रहे दावों पर कहा कि कोर्ट के आदेश पर सर्वे की कार्रवाई पूरी हो गई है। अदालत का अगला आदेश 17 मई को पता चलेगा। सभी पक्षकारों ने सर्वे में पूरा सहयोग किया। कोर्ट कमिश्नर के सर्वे में अंदर क्या दिखा इस पर भी किसी पक्षकार ने कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है तो किसी भी उन्माद के आधार पर नारे लगने की बात सर्वथा गलत है।
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