-प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता जबाबी बहस बहस पूरा नही कर पाये
-प्रतिवादी पक्ष के बाद वादी पक्ष भी अपना प्रति उत्तर दाखिल करेगा
वाराणसी (हि.स.)। ज्ञानवापी.श्रृंगार गौरी प्रकरण में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी जिला जज डाॅ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई हुई। प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने जबाबी बहस में फिर दोहराया कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। इसलिए ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित मसले की सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट को नहीं है, बल्कि वक्फ बोर्ड को है। प्रतिवादी पक्ष की बहस पूरी न होने पर अदालत ने बुधवार को भी बहस जारी रखने का मौका दिया है।
प्रतिवादी पक्ष की जवाबी बहस के बाद हिंदू पक्ष अपना प्रति उत्तर दाखिल करेगा। प्रतिवादी पक्ष के दूसरे दिन के बहस के बाद वादी पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी बात फिर दोहराई है। हम प्रति उत्तर में ज्ञानवापी मामले में वक्फ संपत्ति की धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर अपनी बात रखेंगे। मस्जिद पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी की संपत्ति वक्फ नंबर 100 के रूप में रजिस्टर्ड है। यह पूरी तरह से गलत है।
उन्होंने कहा कि बताया कि अंजुमन की दलील के मुताबिक संपत्ति वक्फ की है। यह वाद वक्फ टिब्यूनल में चलना चाहिए। इस बाबत जो गजट 1944 का दाखिल किया गया वह आलमगीर मस्जिद के बाबत है। उससे ज्ञानवापी से कोई मतलब नहीं है । प्रतिवादी पक्ष के मुख्य अधिवक्ता शमीम अहमद ने 25 फरवरी 1944 के शासनादेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन वक्फ कमिश्नर द्वारा प्रदेश सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के बाद आलमगीर बादशाह द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद को सम्पत्ति समर्पित की थी। इसको प्रदेश शासन ने अपने गजट में प्रकाशित किया था। जिससे साबित होता है कि ज्ञानवापी पुरानी मस्जिद है। बताते चले दिल्ली की राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी स्थित माता श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों के दर्शन की अनुमति मांगी है।
वादी पक्ष के अधिवक्ताओं की दलील है कि दर्शन पूजन सिविल अधिकार है और इसे रोका नहीं जाना चाहिए। श्रृंगार गौरी का मंदिर विवादित ज्ञानवापी परिसर के पीछे है। वहां अवैध निर्माण कर मस्जिद बनाई गई है। दावा ज्ञानवापी की जमीन पर नहीं है। दावा सिर्फ मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और पूजा के लिए है। देवता की संपत्ति नष्ट नहीं होती है। मंदिर टूट जाने से उसका अस्तित्व समाप्त नहीं होगा। वक्फ बोर्ड ये तय नहीं करेगा कि महादेव की पूजा कहां होगी। देश की आजादी के दिन से लेकर वर्ष 1993 तक मां श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा होती थी।
श्रीधर
