Monday, April 13, 2026
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 जैव उर्वरकों के प्रयोग से जायद दलहन का उत्पादन बढ़ाएं किसान

-जायद दलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को दिया प्रशिक्षण

कानपुर (हि.स.)। रवी फसल की कटाई व मड़ाई के बाद खेत खाली हो जाएंगे और इन खेतों पर जायद की फसलें उगाई जा सकती हैं। जायद की फसलों में दलहन की ऐसी फसल है जिस पर जैव उर्वरकों का सही से प्रयोग करने पर किसान भाई बेहतर उत्पादन कर लाभान्वित हो सकते हैं। दलहनी फसलों में जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम कल्चर के प्रयोग करने से पचीस प्रतिशत तक वृद्धि होती है। यह बातें रविवार को सीएसए के मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने कही।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के दलहन अनुभाग द्वारा ग्राम अकबरपुरसेंग, विकासखंड बिल्हौर में एक दलहन जायद गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर म वैज्ञानिक डॉ हरीश चंद्र सिंह ने किसानों को फसल बुवाई पूर्व मृदा परीक्षण के बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दलहन वैज्ञानिक डॉक्टर एके श्रीवास्तव ने दलहन फसलों जैसे मूंग, उर्द आदि की उन्नतशील प्रजातियों के बारे में विस्तार से किसानों को बताया। उन्होंने मूंग की उन्नतशील प्रजाति श्वेता, विराट, शिखा, कनिका के बारे में किसानों को जानकारी दी।

डॉ मनोज कटियार ने फसलों में लगने वाले कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा किसानों द्वारा पूछे के विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर दिया। विश्वविद्यालय के शस्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ डी डी तिवारी ने किसानों को शस्य तकनीकी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राम प्रधान कौशल किशोर तिवारी नए समस्त आए हुए अतिथियों एवं वैज्ञानिकों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्य ककवन अखिलेश अवस्थी ने की। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई तकनीकों को अपनाएं जिससे हुए अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकें। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ खलील खान द्वारा किया गया। इस अवसर पर कृषक राधा रमण तिवारी, श्रीराम फौजी, अशोक कुमार बीडीसी, सैय्यदद्दीन, प्रमोद अग्निहोत्री सहित क्षेत्र के एक सैकड़ा से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया।

महमूद

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